तेरे मेरे प्यार की कहानी ना जाने कब शुरू होगी
करता हूँ मैं तो इंतज़ार मेरे दिलबर से मिलने का
कोई तो होगा जिसे रब ने बनाया होगा बस मेरे लिए
कहाँ जाकर करूँ मैं तलाश मेरे हमसफ़र की

मेरी निगाहों को कब से हैं इंतज़ार उस हसीन का
तेरी गलियों का चक्कर भी हर रोज़ लगा लेता हूँ
ये सोच कर कि शायद तेरा दीदार हो जाए
तेरी ये काली काली जुल्फ़े हैं कि सावन की घटा है
कभी तो बरसो मेरे प्यासे दिल पर बारिश की तरह से

पहला पहला प्यार का एहसास है ये मेरा
मुझे नहीं पता कि इजहार ऐ मोहब्बत कैसे करते हैं
बस यूँ ही तेरी याद से दिल को अपने बहला लेता हूँ
तेरे मेरे प्यार की कहानी ना जाने कब शुरू होगी
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