तेरे हुसन की जितनी भी मैं तारीफ करूँ मुझे तो कम ही लगती है
ये बात मैं तुमसे कहता हूँ आज तेरा हाथ थाम कर
तेरे दिल में मेरे लिए क्या है ये तो मैं नहीं जानता
पर मुझे लगता है कि तुम मेरे ख्वाब की ताबीर हो
तेरी चाहत ने ही मुझे ज़िंदा रखा है अब तक
वर्ना जीने की कोई दूसरी वजह तो मुझे नज़र नहीं आती

अगर तुम ना होते तो मेरे वीराने दिल में आज बहार ना आती
भटकती ही रहती मेरे दिल की ये धड़कनें बेवजह यूँ ही
तुम जो आ गए हो तो मुझको जैसे मंज़िल ही मिल गयी है
तेरे इन फूल से भी नाज़ुक होठों पर आज मेरा नाम है
मेरे लिए तो यही बहुत है अपना दिल बहलाने के लिए
जब भी लिखता हूँ तेरे बारे में मैं तेरी तस्वीर को सामने रखकर
तो मेरे अल्फ़ाज़ कम पड़ जातें हैं बस यही उलझन है

सोचता हूँ कि ख़ुदा से मिन्नत करके तुमको तुम से ही मांग लेता हूँ
कब तक ये इंतज़ार तुम्हारा मैं यूँ करता रहूँगा
कहीं मेरी ये ज़िन्दगी इसी कश्मकश में ना तमाम हो जाये
जब भी तुम आती हो सामने तो मेरे दिल की धड़कनें बढ़ ही जाती हैं
तेरे हुसन की जितनी भी मैं तारीफ करूँ मुझे तो कम ही लगती है
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