थोड़ा हम चलें और थोड़ा तुम चलो शायद ये दूरियां हमारी कुछ कम हो जाए

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थोड़ा हम चलें और थोड़ा तुम चलो शायद ये दूरियां हमारी कुछ कम हो जाए
मैं तो चाहूंगा तुझे हर दम मेरी जान चाहे तुम मुझे चाहो या ना चाहो
जब ये सफर शुरू किया था तो सोचा था कि तुम बनोगे मेरे हमसफ़र
पर अब ये जाना कि बिना तुम्हारे ही मुझे तय करना होगा ये रास्ता
प्यार की कस्मे खा कर तुम ना जाने कहाँ खो गए हो
तेरी उम्मीद और तेरा इंतज़ार आखिर कब तक मैं करूं
मैं तो हूँ दीवाना तेरी चाहत का और मैं तो बस तुझ पर ही आहें भरूँ
सच ही कहा है किसी ने कि प्यार किया नहीं जाता वो तो बस हो जाता है
तेरी अँखियों का सुरूर हर पल मेरे दिल में रहता है
सोचता हूँ आज दे दूँ तुमको मैं एक गुलाब का फूल
और महका लूँ अपना जीवन और हटा लूँ चेहरे पर पड़ी धुल
किसी रोज़ तुमको मैं अपने सपनों की रानी बना लूंगा
चाहे तुम लाख करों मेरी मोहब्बत को इंकार लेकिन फिर भी
मैं अपनी एक प्रेम कहानी बना लूंगा
मैंने सुना है कि रूठना तो हसीनों की अदा होती है
पर तुम्हारी इसी अदा पर अब मैं फ़िदा हो चूका हूँ
अगर हम मिलते रहे रोज़ यूँ ही तो ये भी मुमकिन है
कि तूँ एक दिन मान जाये और मेरी बाँहों में चैन की नींद सो जाए
थोड़ा हम चलें और थोड़ा तुम चलो शायद ये दूरियां हमारी कुछ कम हो जाए