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दिल की चौखट पर दस्तक देते हैं कुछ अजीब से ख्याल, बुरा है मेरा हाल

दिल की चौखट पर दस्तक देते हैं कुछ अजीब से ख्याल, बुरा है मेरा हाल

जब भी अकेले में रात को सितारे भी थक जाते हैं टिमटिमाते हुए

और चाँद भी कुछ नीरस सा होकर अंगड़ाई तोड़ता है

ऐसे में अचानक कभी-कभी मेरे दिल के दरवाजे पर कोई खटखटाता है

मैं जब ये पूछता हूँ तो मुझसे कहता है

कि मैं तो बस तुम्हारा ही ख़्याल हूँ जिसे दबा रखा है तुमने ना जाने कब से

शायद जब से तुम मुझसे दूर हो गए हो तब से

मैं जब ये पूछता हूँ कि तुम कहाँ से आए हो

तो मुझे ये जवाब मिलता है कि

मैं आया हूँ तेरे मन के रास्ता से होते हुए तेरे दिल के भीतर

ये ख्याल जो आया है तो दिल की गहराई में कहीं उतर गया है

अभी कुछ देर पहले तो उजाला था हर तरफ

पर ना जाने क्यों अब हर तरफ अँधेरा पसर गया है

दिल में ना जाने क्यों एक अजीब सा सन्नाटा है

ना ही कोई हलचल है और ना ही कोई हरकत

चोरी-छिपे मेरा ये दिल ना जाने किसको ढूँढ रहा है

ना जाने किसका रास्ता देख रहा हूँ मैं

चारों तरफ ख़ामोशी और तन्हाई के सिवा कुछ भी नहीं

मैं लुटा हुआ आशिक़ तो वो चमकती हुई हसीना है

हमारा कोई मेल नहीं, मेरे माथे पर आया पसीना है

क्या होगा अंजाम मेरी इस गुमनाम मोहब्बत का ये तो मैं नहीं जानता

तुमने दलीलें तो बहुत सी दी हैं मुझको

लेकिन मैं इन दलीलों को नहीं मानता

मुझे क्या लेना इस बात से लोग क्या कहेंगे

ये दर्द-ऐ-जुदाई आखिर कब तक हम यूँ ही सहेंगे

अगर मैं टूट कर बिखर जाऊँ तो तुम मुझको लेना संभाल

दिल की चौखट पर दस्तक देते हैं कुछ अजीब से ख्याल, बुरा है मेरा हाल

ये ख्याल मुझको कभी बचपन की गलियों में ले जाता है

वो भी क्या दिन थे, ना तो कोई सोच थी और ना ही कोई चिंता

कागज़ की कश्ती को बना कर पाने में बहा देते थे

जो भी मिल जाता था प्यार से उसे अपना बना लेते थे

मिटटी की खुश्बू दिल को कितना सुकून देती थी

माँ की डाँट में भी प्यार छुपा होता था

और पापा की हथेली में जैसे पूरा संसार छिपा था

पर जैसे-जैसे हम बड़े होते गए वो खुशियां हमसे छिनती गई

अब तो बस यादों का कारवाँ ही बाकी रह गया है

फिर जब जवानी की दहलीज़ पर कदम रखा तो एक नयी उमंग थी

पहली मोहब्बत के एहसास में रात भर जागती थी ये आँखें

दिल नहीं भुला है आज भी उनसे हुई वो पहली मुलाकात

उसने कहा था कि अब हम एक-दूजे का कभी ना छोड़ेंगे साथ

फिर ना जाने क्या हुआ कि सपनों के सभी रंगा फीके पड़ गए

इश्क़ का सफर बीच में ही रुक गया और वो अपनी ही ज़िद पर अड़ गए

मोहब्बत की मंज़िल अब ना जाने क्यों अधूरी सी लगती है

ऐसे लगता है जैसे उसकी चाहत मेरे ख्यालों को उलझाती है

आजकल जवाब काम ही मिलते हैं बस सवालों का ही बोलबाला है

ऐसे हालात में कभी खुद से भागता तो कभी खुद को तलाशता हूँ

कभी-कभी खुद को भुलाकर मैं कर देता हूँ बड़े-बड़े कमाल

दिल की चौखट पर दस्तक देते हैं कुछ अजीब से ख्याल, बुरा है मेरा हाल

कभी ये ख्याल बारिश की पहली बूँद सा मीठा हो जाता है

तो कभी चांदनी रात की ठंडी हवा में चैन से सो जाता है

जब कोई बरसों से बिछड़ा साथी अचानक से सामने आ जाता है

तो इस दिल की ख़ुशी का कोई भी ठिकाना कहाँ रहता है

कभी हम खुद को तो कभी अपने घर को देखते हैं

कैसे संभाले इतनी ख़ुशी को बस ये ही सोचते हैं

ऐसे लगता है जैसे कि बंद कमरे की ये दीवारें कुछ कहना चाहती हैं

ये घड़ी की टिक-टिक रात की तन्हाई में खलल डालती

अपने दिल की दहलीज़ पर खड़ा मैं सुनता हूँ अपने ख्यालों की आहट को

मैं चाहता हूँ कि एक ऐसी दुनिया हो जहाँ हर किसी के सपने साकार हों

जहाँ कभी ना हों गम के साये बस प्यार ही प्यार मिले

ये जीवन एक सफर है और ये ख्याल हमारे दिल की परछाई हैं

ये परछाइयां कभी हमें हंसाती हैं तो कभी रुलाती हैं

आज से खुल के जीना है मुझको, बस यही है मेरा ख्याल

दिल की चौखट पर दस्तक देते हैं कुछ अजीब से ख्याल, बुरा है मेरा हाल