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दिल मेरा आज तेरी पनाह में है मेरे महबूब

दिल मेरा आज तेरी पनाह में है मेरे महबूब

तुझे अपना मान कर मैंने अपना दिल तुम्हे दे दिया

अकेले ये ज़िन्दगी का सफर नहीं कट सकता

तुम अगर साथ दो तो दुनिया मेरी आबाद हो जाये

सुना है कि हसीनों की अदाएं बड़ी कातिल होती हैं

मैंने भी कलेजा रख दिया हैं चाकू की नोक पर

नज़र तेरी हैं या तीर कमान हैं कसम से

जो भी निशाना लगा हैं दिल के आर पार है

ज़ख्म भी देते हैं दिल पर और उफ़ भी नहीं करने देते

पता नहीं ये हूनर कहाँ से सीखा है आपने

किसी को क्या बताएँ कि क्या क्या हुआ है हमारे साथ

हर कदम पर दर्द ए दिल हमारा बढ़ता ही जा रहा है

तुम चाहो तो मिल जाये मेरे बेचैन दिल को चैन

दिल मेरा आज तेरी पनाह में है मेरे महबूब