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दिल मेरा आज तेरे इश्क़ की पनाह में है

दिल मेरा आज तेरे इश्क़ की पनाह में है

मोहब्बत मेरी अब परवान चढ़ने लगी है

आँखें मेरी देखती हैं अब सपने सुहाने साजन के

दोस्त मेरे अब मुझे ढूंढ़ते ही रहते है मिलने को

पर मैं तो बस तेरे ही ख्यालों में ग़ुम रहने लगा हूँ

मेले लगे हो चाहे जितने पर मैं तो तन्हाई ढूंढ़ने लगा हूँ

अब के बरस इस सावन में तुझसे मुलाकात हो जाये

तो मेरे बंजर पड़े दिल पर कुछ हरियाली छा जाये

किताबें भी जितनी पढ़ी हैं अब तक किसी काम ना आयी मेरे

अगर ढाई अक्षर प्रेम के भी पढ़े होते तो अच्छा होता

इजहार ऐ मोहब्बत कैसे करते हैं मैं नहीं जानता

पहला पहला प्यार है मेरा कोई ख़ता हो जाये मुझसे तो माफ़ करना

कुछ लाइनें लिखी है तुम्हारे लिए दिल से मैंने तेरी तारीफ में

तुम इन्हे पढ़कर खत मेरा अपने सीने से लगा लेना

मंज़िल मेरी मोहब्बत की अब तो बस इश्क़ की राह में है

दिल मेरा आज तेरे इश्क़ की पनाह में है