दिल हमारा तोड़ कर तुम भी चैन से कहीं ना रह पाओगे
जहाँ भी तुम जाओगे वहीं मेरी याद तेरे साथ जाएगी
चाहे मिल लेना तुम लाखों लोगो से भी लेकिन
दीवाना कोई मुझसा नहीं होगा ज़माने में कहीं
मेरी तो ज़िन्दगी मैं काट लूंगा नाम तेरा ही लेकर

मगर दिल कोई तुम्हारा जब तोड़ देगा तो कहाँ जाओगे
जब भी मिले हो तो तुमने रखा है एक पर्दा हमारे बीच में
रुख से अपने ना कभी नकाब हटाया आपने
मिलने ना दिए हमारे नैना एक दूजे से कभी
जो ये उलझन हमारी है अब क्या बताएं किसी को
खैर अब तो हमने भी मान लिया कि तुम मेरे नहीं हो सकते

अगर यही तुम्हारी मर्ज़ी है तो फिर जो जी चाहे तुम कर लो
हमें तो मिल गयी है बेकरारी उम्र भर के लिए इश्क़ में
पर अब तुम किस पर अपने हुसन की ये बिजलिया गिराओगे
जिस तरह से सताया है तुमने हर पल मुझको
किसी और पर तुम ये ज़ुल्म नहीं कर पाओगे
अपनी गलती का एहसास जब होगा तो तुम मेरे बिन ना रह पाओगे
दिल हमारा तोड़ कर तुम भी चैन से कहीं ना रह पाओगे
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