नयी उम्मीद का सूरज निकल रहा है कब तक सोता रहेगा तू

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नयी उम्मीद का सूरज निकल रहा है कब तक सोता रहेगा तू

चल अब उठ जा और अपनी किस्मत को संवार ले

कब तक बदकिस्मती का रोना रोता रहेगा

काम कर ले कुछ ऐसा अपनी ज़िन्दगी में

कि तुझको भी फक्र हो खुद पर

अपने दिल के किसी कोने में कोई ख्वाब तो देख

कुछ नए सपने सजा ले अपनी आँखों में

जब तूँ ठान लेगा कुछ करने की

तो फिर धीरे धीरे रास्ता भी मिलने लगेगा

जिस पर तुझे चलते जाना है

ऐसे बहुत से मुसाफिर भी मिलेंगे

जो तुम्हारी तरह ही कुछ पाना चाहते हैं

ऐसे लोगों के साथ रहो दोस्तों

जो कुछ कर गुजरना चाहते हैं

दिल में कभी नाउम्मीद को घर मत करने देना

तुझे अपनी मेहनत से वक़्त को भी हैरान करना है

किसी को दिखाने के लिए ही काम मत करना

वो करना जिसकी वाकई ज़रूरत है तुझको

मुकाबला अगर करना भी पड़े तुझको कभी

तो अपने आप से ही कर लेना

हर रोज़ उठ कर आइने में अपनी सूरत देख लेना

गौर फरमाना कि क्या तुम कुछ बेहतर हो रहे हो

पीछे जो बीत गया वो इतिहास बन गया

भविष्य में क्या है ये तो कोई नहीं जानता

तेरे पास सिर्फ ये आज है और ये पल हैं

तूँ आज दिल और जान लगा दे

मंज़िल भी अब तेरा इंतज़ार कर रही है

जब तक ठिकाने पर ना पहुंचे तूँ

तेरे लिए रुकना और थकना मना है

कब तक अपने सपनों को खोता रहेगा तूँ

नयी उम्मीद का सूरज निकल रहा है कब तक सोता रहेगा तू