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ना जाने क्यों ये पागल दिल मेरा बस तुमको ही चाहता है

ना जाने क्यों ये पागल दिल मेरा बस तुमको ही चाहता है

ज़माने में हसीनों की तो कोई कमी नहीं

पर दिल ये मेरा आ गया है तुम पर जब से

लगाता रहता हूँ तेरी गली का चक्कर और अपना पता भूल गया हूँ

कभी हँसी थी मेरे होठों पर आज ये लब मेरे खामोश है

बैठा बैठा ही खो जाता हूँ कहीं भी मुझको अब ना कोई होश है

दोस्तों की महफ़िल में भी अब मेरा मन नहीं लगता

तेरी याद मेरे दिल में काँटों की तरह से चुभती है

पर इस दर्द से भी मुझको कोई ख़ास शिकायत नहीं

सुना है कि मोहब्बत का आग़ाज़ ऐसे ही होता है

दिल की बेचैन धड़कने तेरे नाम से ही धड़कती हैं

तेरी ज़रूरत है मुझे जीने के लिए साँसों से भी ज्यादा

मैंने तो अपनी बात कह दी अब तेरा क्या है इरादा

या तो तुम लोगों की सोच लो या अपने आशिक़ की खैर ख़बर ले लो

तुम अपना फैसला बता दो मुझको आज मैं तैयार हूँ सुनने को

दीवाना तेरा नाम तेरा ही लिखकर दिल पर तेरा हो जाना चाहता है

ना जाने क्यों ये पागल दिल मेरा बस तुमको ही चाहता है