ना जाने हमारी ये मुलाकातें क्या रँग लायेंगी

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ना जाने हमारी ये मुलाकातें क्या रँग लायेंगी

ज़माने भर की नज़रें हम दोनों पर रहती हैं हर वक़्त

कैसे मिल सकता हूँ तुमसे बस यही ख्याल रहता है

ना कोई होश रहता है ना अपनी कुछ खबर रहती है

दिल और दिमाग में मेरे बस तुम ही तुम रहती हो 

तेरे इश्क़ में मेरा दिल गिरफ्तार हो चूका है

मुझे अपने प्यार की कैद में रखना कभी रिहा मत करना

मेरे ये कदम बस तेरी ओर ही खींचे चले आते है

रास्ता चाहे कोई भी हो पर मेरी मंज़िल सिर्फ तुम हो

बेक़रारी में ही करार मिल रहा है मुझे तो आजकल

तेरी यादों के साये में ही बीत रही है मेरी ज़िन्दगी

सोचा है कि भेज दूँ तुझे एक प्यार भरा खत

लिख दूँ अपने दिल की बात और जाहिर कर दूँ अरमान

ये सोचता हूँ मैं कि तुम मुझे कबूल करोगी या नहीं

ना जाने हमारी ये मुलाकातें क्या रँग लायेंगी