प्यार क्या है ये मुझको नहीं थी खबर
जब से तुमको देखा है मैं तेरा हो गया
कैसे जताना है प्यार मैं तो ये भी नहीं जानता
दिल ये मेरा नहीं लगता तेरे बिन अब कहीं
जब पास होती हो तो तुमको ही देखता हूँ

जब दूर चली जाते हो मुझसे तो
बस तेरे बारे में ही सोचता हूँ
क्या यही होता है प्यार कोई तो बताये मुझे
दिल जब किसी की ख़ैर मांगने लगे
तो फिर ये एहसास होता है किसी से अपनेपन का

सारी दुनिया की रौशनी से मुझे क्या लेना
मेरा दिल तो बस तेरे चेहरे की चाँदनी से ही चमकता है
शायद मेरे इश्क़ वाला शुरू हो गया है सफर
प्यार क्या है ये मुझको नहीं थी खबर
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