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बचपन के थे हम दोस्त ख़ास कभी, आज दिल मेरा ये कहता है कि तुमसे अपने प्यार का इज़हार कर दूँ

बचपन के थे हम दोस्त ख़ास कभी, आज दिल मेरा ये कहता है कि तुमसे अपने प्यार का इज़हार कर दूँ

बात उन दिनों की है दोस्तों जब हम बचपन में एक-साथ खेलते थे और बहुत मज़े करते थे

वो रहती थी मेरे ही मोहल्ले की गली में कुछ मकान छोड़कर और हमारा आना-जाना रहता था

हम-दोनों हर वक़्त रहते थे साथ और खेल-खेल में उसका रूठना और मेरा उसको मनाना लगा रहता था

बचपन में वो बहुत ही प्यारी और मासूम सी हुआ करती थी और मेरे गाल बड़े प्यार से छुआ करती थी

मैं भी तो होता था गोलू-मोलू सा और हर वक़्त कोई नयी शरारत करने की सोचा करता था

उसके तो बहुत से दोस्त हुआ करते थे और मैं अक्सर उसे दूर से टकटकी लगा कर देखा करता था

एक बार की बात है उसने अपने जन्मदिन पर सभी दोस्तों को बुला रखा था

मैं भी शामिल था उसकी शानदार बर्थडे पार्टी में और हैरान था उसके घर की शानो-शौकत को देखकर

उसने बड़े प्यार से केक को काटा और सभी बच्चों ने उसको बोला हैप्पी बर्थ डे टू यू

मेरे दिल ने भी उसको मुबारकबाद दी और उस दिन ऐसा लगा जैसे कह दूँ कि मेरी फीलिंग्स तुम्हारे लिए हैं नई नई

उसने मेरा हाथ पकड़ कर मेरे साथ खूब सारी मस्ती की, कुछ ही देर में मेरी भी हिचकिचाहट जैसे दूर हो गई

मैं तब बच्चा था तो समझ नहीं पाया कि उसके प्रति मेरा ये आकर्षण क्यों है आखिर

पर इतना ज़रूर समझ गया था कि वो मुझे अच्छी लगने लगी थी और ऐसे लगा जैसे उससे मिल कर मैं अपनी आँखें चार कर दूँ

बचपन के थे हम दोस्त ख़ास कभी, आज दिल मेरा ये कहता है कि तुमसे अपने प्यार का इज़हार कर दूँ

धीरे-धीरे वक़्त गुजरता रहा और हम भी उम्र के साथ बड़े होते रहे

हर रोज़ ऐसा लगता था मुझको जैसे कि वो हमेशा मेरे साथ रहे और हम एक-दूजे में खोते रहे

चलते-चलते मैं कभी-कभी अक्सर यूँ ही उसके हसीन ख्वाबों में खो जाता था

जब पढ़ने की बारी आती तो किताब को अपने सीने पर रखकर सो जाता था

पता नहीं क्यों मेरा मन किसी भी काम में नहीं लगता था, मैं हर वक़्त कुछ उखड़ा-उखड़ा सा रहता था

हर रोज़ मैं उनसे मिलने के नए-नए बहाने ही ढूंढ़ता रहता था

मेरा ये दिल तो जैसे बस उसके लिए ही धड़कना चाहता था

बचपन की दोस्ती हमारी अब धीरे-धीरे बड़ी हो रही थी शायद ये अब दोस्ती से बढ़कर कुछ और था

रहने लगा था मैं अब काफी शांत-शांत सा पर मेरे दिल में तो हर वक़्त उसके नाम का रहता शोर था

जब तक मैं उससे मिल नहीं लेता था, मुझे ऐसे लगता था जैसे मेरे दिल की दुनिया हो गई वीरान हो

फिर एक दिन हिम्मत करके मैंने एक खत लिख डाला, और लिखा की तुम मेरी ज़िन्दगी हो और मेरी जान हो

बहुत कोशिश की मैंने पर मैं उस खत को कभी उसको दे नहीं पाया

बस ये सोचा कि कहीं वो मेरे प्यार को ठुकरा ना दे और मैं मेरे दिल को कहीं यूँ ही ना बेकरार कर दूँ

बचपन के थे हम दोस्त ख़ास कभी, आज दिल मेरा ये कहता है कि तुमसे अपने प्यार का इज़हार कर दूँ

मैंने तो बड़ी कोशिश कि उसको समझाने की पर वो तो शायद अभी तक बचपन की दहलीज़ पर ही थी

धीरे-धीरे उस पर जवानी का रंग भी चढ़ने लगा था और वो बहुत ही हसीन भी हो गई थी

बचपन के खेल-खिलौने अब काफी पीछे छूट चुके थे और वो काफी कमसिन हो गई थी

अब जब भी मैं उससे मिलता था तो वो मुझसे थोड़ा-थोड़ा सा शर्माने भी लगी थी

उसकी अदाएं भी अब धीरे-धीरे मेरे नाज़ुक से दिल को तड़पाने लगी थी

मैंने कई बार कोशिश की उसको अपना हाल-ऐ-दिल बताने की और उसको समझाने की

पर वो तो मुझे बस अपने बचपन का दोस्त ही मानती थी, इससे ज्यादा उसके मन में मेरे लिए कुछ भी ना था

दिल मेरा ये करता था कि जैसे मैं उसकी काली-काली जुल्फों को अपनी उँगलियों से ही सुलझा दूँ और सँवार दूँ

बचपन के थे हम दोस्त ख़ास कभी, आज दिल मेरा ये कहता है कि तुमसे अपने प्यार का इज़हार कर दूँ

दिन यूँ ही बीतते गए और मुझे ऐसे लगा शायद मेरी ये एकतरफा मोहब्बत एक दिन यूँ ही दम तोड़ देगी

मैं उसको कभी भी खोना नहीं चाहता था और मुझे ऐसा लगा कि वो भी मेरी खातिर से दुनिया छोड़ देगी

एक दिन उसने मुझे एक लव-लेटर दिखाया जो किसी लड़के ने उसको दिया था

उसने मुझसे पूछा कि ये प्यार क्या होता है और ये कैसे होता है

तब मैंने उसको कहा कि जब ये दिल किसी की सलामती की दुआ करता है

और जब कोई किसी पर दिलो-जान से मरता है और ठंडी आहें भरता है तो समझो वो प्यार किसी से करता है

मेरी बातें सुनकर वो अचानक से मेरे करीब आ गई और मुझे अपने सीने से लगा लिया

उसने मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और कहा कि आज तुमने मुझे प्यार का असली मतलब समझा दिया

मैंने कहा तो ठीक है तुम अब अपने हिसाब से फैसला लो, अब मैं तो यहाँ से चलता हूँ

मैंने तो बहुत कोशिश कर ली तुमको अपना बनाने कि पर मैं तो अब भी अपने हाथ मलता हूँ

ये कह कर मैं वहां से चला गया और अपने दिल पर पत्थर रखकर घर आ गया

उस रात बहुत ही ज़ोरदार बारिश हो रही थी पर मेरा दिल रो रहा था

मैं ये सोच कर था परेशान कि मेरे साथ ये सब क्यों हो रहा था

इतने में किसी ने दरवाज़ा खटखटाया और मैंने सोचा कि इतनी रात को कौन है आया

मैंने जब दरवाज़ा खोला तो मैं तो जैसे दंग ही रह गया

मेरी आँखों के सामने मेरा महबूब खड़ा था और मुझे तो जैसे इस बात का नहीं हो रहा था यकीन

तब उसने मुझे कस के गले से लगा लिया और कहा कि चलो इसमें खो जाएँ और हो जाये ये मंज़र हसीन

मैंने भी उसको बाँहों में भर कर कह दिया कि मैं तुझे दिलो-जान से प्यार करता हूँ

तेरे लिए ही तो मैं जीता हूँ और मेरी जान तुम्ही पर तो मैं मरता हूँ

अब बन जाओ मेरी सदा के लिए, आओ हम दोनों एक हो जाएं और तुम्हारी झोली मैं खुशियों से भर दूँ

बचपन के थे हम दोस्त ख़ास कभी, आज दिल मेरा ये कहता है कि तुमसे अपने प्यार का इज़हार कर दूँ