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मुझे अब किसी के सहारे का इंतजार नही, मैं अपनी ज़िन्दगी को अपने तरीके से जीना चाहता हूँ

मुझे अब किसी के सहारे का इंतजार नही, मैं अपनी ज़िन्दगी को अपने तरीके से जीना चाहता हूँ

ये जो जीवन है, ये एक ऐसा पथ है जिस पर किसी को चलना पड़ता है

इस कठिन पथ पर कभी धूप मिलती है तो कभी छाँव हो जाती है

कभी इसमें उम्मीदों का सूरज खिलखिला कर हँसता है

तो कभी साँझ के सितारे अपनी हल्की रौशनी से दिल को लुभाते हैं

मैंने तो जब भी कभी अपने भीतर झाँक कर देखा है तो यही पाया है

कि एक प्यारा सा दिल है मेरे पास और जीने के लिए हैं कुछ जज्बात

जब दूर किसी पहाड़ पर मैं देखता हूँ बादलों को आते और जाते हुए

तो ऐसा लगता है जैसे मेरा जीवन भी उस पहाड़ की तरह ही है

जिसमे कभी दुःख आ जाते हैं तो कभी खुशियां दस्तक देती हैं

नदिया की इन शोख़ और चंचल लहरों पर जब पड़ती हैं सूरज की किरणें

तो ये पानी की धारा सोने की तरह से चमकती है और मेरा दिल उल्लास से भर जाता है

ये जो प्रकृति के अद्भुत नज़ारे हैं, मैं आज इन्हे अपनी आँखों से पीना चाहता हूँ

मुझे अब किसी के सहारे का इंतजार नही, मैं अपनी ज़िन्दगी को अपने तरीके से जीना चाहता हूँ

बहुत हो गया है यूँ टुकड़ों में जीना, नही चाहिए मुझे अब ये उधार की ज़िन्दगी

मैं उड़ना चाहता हूँ एक पक्षी की तरह इस नील गगन में

मेरी उड़ान मेरी मर्ज़ी के मुताबिक ही हो और मुझ पर ना कोई भी दबाव हो

मेरे इस नादान मन को भी अब शान्ति की तलाश है

अभी तक मैंने एक लम्बा सफर तय किया है संघर्ष करते हुए

मैंने अपना सब कुछ ही दांव पर लगा दिया है सभी को खुश करने के लिए

लेकिन कोई भी फायदा ना हुआ, जिसने मेरे बारे में जो सोचा अपनी सहूलियत के हिसाब से सोचा

मेरी किसी भी उम्मीद और भावनाओं की क़द्र तो कभी भी ना की किसी ने भी

खैर मैं अब इन सब बातों को बहुत पीछे छोड़ आया हूँ

मेरे आगे अब कुछ है तो बस ये कुदरत के हसीन नज़ारे हैं

ये गुलाब के खूबसूरत फूलों की बगिया अब बुलाती है मुझे और कहती है कि पास मेरे आजा

मेरा ये बोझिल सा मन भी अब ऊब चूका है रोज़-रोज़ की जदोजहद से और कुछ नया करना चाहता है

मेरे ये नाज़ुक सा दिल छलांग मरना चाहता है हरी घास से मैदान में एक हिरण की तरह

दिल करता है कि किसी घने जंगल में मैं कहीं पर जाकर खो जाऊँ

मुझे कहीं पर भी कोई ना ढूंढ पाए, कुछ इस तरह से मैं अपने आप को छिपाऊँ

कोई भी ग़म मेरी ज़िन्दगी का अब कभी भी मेरा पीछा ना कर पाए

बहुत हो गया है, बहुत सहन भी कर लिया है, बस अब मैंने ये तय कर लिया है

कि जीना है अब खुद के लिए भी, खुद की ख़ुशी को भी तवज्जो देना है

कभी-कभी लगता है कि मैं खुद को भी प्यार कर लूँ और खुद से अपनी मोहब्बत का इज़हार भी कर दूँ

कह दूँ खुद से कि मैं तुझे बहुत चाहता हूँ दिलों-जान से भी ज्यादा

जब से मैंने खुद को जाना और पहचाना है तो ज़िन्दगी कुछ आसान हुई है मेरे लिए

मैं अपने सीने के सब ज़ख्मों को कुदरत की गोद में बैठ कर सीना चाहता हूँ

मुझे अब किसी के सहारे का इंतजार नही, मैं अपनी ज़िन्दगी को अपने तरीके से जीना चाहता हूँ