मुझे ना कभी तुम अपनी नज़र से गिराना

Posted by

मुझे ना कभी तुम अपनी नज़र से गिराना

मेरा क्या है मैं तो हूँ एक आशिक़ आवारा

मगर ये सोच लेना कि तुझे क्या कहेगा ज़माना

ज़माने भर की नज़रे लगी हुई हैं आज तुझ पर

जब से हुआ है मेरा तुमसे दोस्ताना

लाज रखना मेरी तुम मैं तेरा ही तो हूँ

मेरे इन लबों पर रहेगा बस तेरा ही तराना

ज़िद है हमको कि हम ना जायेंगे अब कहीं

मेरा जीना और मरना है अब तेरी ही गलियों में

मुझको कुछ इस तरह से इश्क़ का मज़ा मिला है

मुस्कुरा कर जब उसने नज़र मिलाई तो लगा कि ज़िंदा है

तुझे कसम है कि कभी मत छोड़ना वफ़ा की राह को

तेरे सीने में मेरा दिल रहता है अब

ज़रा सोच समझ कर तुम हम पर लगाना निशाना

मुझे ना कभी तुम अपनी नज़र से गिराना