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मेरा दिल है ख़ाली मक़ान के जैसा जिसमे अब कोई रहता नहीं

मेरा दिल है ख़ाली मक़ान के जैसा जिसमे अब कोई रहता नहीं

ऐसा नहीं है कि ये मकान हमेशा से ही ख़ाली था

एक ऐसा भी वक़्त था कि रहते थे इसमें बहुत से लोग

माँ बाप भाई बहन सभी बहुत प्यार से

जैसे जैसे वक़्त बीता बच्चे अब बड़े हो गए थे

एक एक करके सभी बच्चे अपनी ज़िन्दगी में आगे बढ़ गए

और पीछे रह गए बूढ़े माँ बाप और वही घर

आज बरसों के बाद फिर से पीछे मुड़कर देखा है

मकान तो वहीं पर खड़ा है अभी भी

पर अब उसमे नहीं रहता कोई भी

वक़्त के साथ ये भी बूढ़ा और सुनसान हो गया है

कमज़ोर हो गयी हैं इसकी दीवारें

क्या पता कब ये दीवारें भी ढह जाएं

शायद यही किस्मत थी इस घर की

और इसमें रहने वाले सभी लोगों की भी

अब कोई किसी से बात नहीं करता

सभी एक दूजे से अजनबी और दूर हो गए हैं

कहना तो सबको है बहुत कुछ पर कोई कुछ भी कहता नहीं

मेरा दिल है ख़ाली मक़ान के जैसा जिसमे अब कोई रहता नहीं