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मेरा महबूब आया है मुझसे मिलने ऐ वक़्त तू कुछ देर तो ठहर जा

मेरा महबूब आया है मुझसे मिलने ऐ वक़्त तू कुछ देर तो ठहर जा

बड़ी लम्बी जुदाई के बाद ये मौका मिला है आज मुझको

अपने सनम का मैं जी भर के दीदार तो कर लूँ

एक अरसा बीत गया है उसके पहलू में खुद को खोया नहीं

जब से बिछड़े हम मैं तो कभी भी चैन से सोया नहीं

बहारों तुम भी आज गीत हमारे मिलन के गाओ

ये काली काली आंखें हैं कि बादल की घटा है कोई

ना जाने कब ये बरस जाएं मुझपर बारिश की बूंदों की तरह

कुछ ऐसा इंतज़ाम हो जाये कि आज ये वक़्त बस यहीं पर थम जाये

क्या पता ये मुलाकात और ये बरसात कल फिर से हो ना हो

अभी तो तक ये ज़िन्दगी गुजर रही थी तंग हालात में तेरे बगैर

आज तुम आये हो तो मेरी जान में जान आयी है

ये जो इश्क़ की गलियां है मैंने इनको तेरा पता दे दिया है

शायद तूँ फिर से मिल जाये मुझे जीवन के किसी हसीन मोड़ पर

तेरी और मेरी आंखें मिल कर एक दूजे को अपना बना ले तो बात बने

ऐ मेरी उलझी हुई खामोश ज़िन्दगी तू भी आज संवर जा

मेरा महबूब आया है मुझसे मिलने ऐ वक़्त तू कुछ देर तो ठहर जा