मेरी आशिकी का असर तुम पर हो जाये यही मेरे दिल की दुआ है
भीड़ में भी तनहा तनहा रहता हूँ मैं जब से इश्क़ तुमसे हुआ हैं
मेरी इस रूह को चैन और सुकून अब सिर्फ तुम से ही है
जबसे तुमने देखा है मुझे एक नज़र प्यार से
दिल मेरा खिल उठा है तेरे इश्क़ की बहार से
मोरनी सी चाल ये तेरी मुझे बड़ी मस्त लगती है
तेरे गोर गोर गाल पे काले तिल के भी क्या कहने
जब भी तुम घर से तैयार होकर निकलती हो
जी करता है बस तुम्हे देखता ही रहूं कसम से
बाँहों के दरमियान हमारा ये इश्क़ बस यूँ ही पलता रहे
तुम जो कभी रूठ जाओगे तो तेरे नाज़ उठा लेंगे हम
तेरे नखरें हम अपनी पलकों पे सजा कर रखेंगे
जब कभी थक जाओगे चलते चलते ज़िन्दगी में तुम
तो हम तुम्हे अपनी बाँहों में उठा लेंगे
एक बिजली सी दौड़ती है मेरे जिस्म से जैसे
जब जब भी तुमने अपने नाज़ुक हाथों से मुझे छुआ है
मेरी आशिकी का असर तुम पर हो जाये यही मेरे दिल की दुआ है
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