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मेरी ये आँखें बस तुझे ही देखती हैं मैं देखता हूँ जिस तरफ

मेरी ये आँखें बस तुझे ही देखती हैं मैं देखता हूँ जिस तरफ

दूर दूर तक कोई नहीं है कहीं नहीं है सिवा तेरे

ये दुनिया और ये महफ़िल शायद अब मेरे किसी काम की नहीं रही

तेरे बिना लगता है सब सूना सूना सा चाहे कितने भी लगे हो मेले

तेरे बिना अब कैसे जिया जायेगा ये सोचते हैं जब होते हैं हम अकेले

दिल की ये बातें मैं तुम्हारे सिवा किसी को बता भी नहीं सकता

सोचता हूँ कि कहीं तूँ बदनाम ना हो जाये ज़माने में

यही कश्मकश रहती है मेरे इस दिल के अफ़साने में

बहार तेरे बग़ैर कुछ रूठी रूठी सी लगती है

चारों तरफ तो फूल खिलें है पर दिल मेरा मुरझाया है

ये जो हालत बने है मेरे कभी तो शायद बदलेंगे

जब आप आकर मुझसे इन हसीन वादियों में मिलेंगे

फिर से ये वादियां और से ये आसमान और भी हसीन हो जायेंगे

बाँहों में बाहें डाल कर एक दूजे के हम गीत मिलन के गायेंगे

तुम बैठी होगी सज संवर कर कहीं नदियाँ के किनारे पर

और कर रही होगी मेरे आने का इंतज़ार

मैं भी अपनी बाँसुरी बजाकर तेरे दिल को बहलाऊंगा

हर राह पर तुम बैठी हो मैं जाऊँ तो जाऊँ किस तरफ

मेरी ये आँखें बस तुझे ही देखती हैं मैं देखता हूँ जिस तरफ