मैंने जब दिल से पूछा कि जाना कहाँ है तो तेरे शहर का ख़्याल आया

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मैंने जब दिल से पूछा कि जाना कहाँ है तो तेरे शहर का ख़्याल आया

जब देखा था मैंने तुझे तेरी सखी सहेलियों के साथ पहली बार

वो मासूम सा चेहरा तेरा आज भी मेरी आँखों के सामने ही रहता है

जब तुमने बचपन से निकल कर जवानी में कदम रखा था

तो सारे शहर में बस तेरे हुसन के ही चर्चे होते थे

तुमसे मिलने के लिए बहुत से दीवाने बहाना ढूंढ़ते थे

पर तुमने कभी भी किसी को कोई इशारा नहीं किया

तुम्हारी हर एक अदा को मैंने सीने से लगा रखा है

बरसो बीत गए हैं इन बातों को पर लगता है जैसे कल की ही बात हो

जब हम टकरा गए थे एक दूजे से अनजाने में

तो मैंने सोचा कि मुझे मेरा हमसफ़र मिल गया है

कई बार अपना इज़हार ऐ इश्क़ करने की कोशिश भी की

पर जुबान ने कभी दिल का साथ नहीं दिया

अगर कह देते अपने दिल की बात तो आज आप हमारे होते

अब तुम्हे पाने की कोई उम्मीद बाकी नहीं रही

तुमने अपनी ज़िन्दगी का साथी किसी और को चुन लिया है 

अगर तुम भी किसी से प्यार करो तो फिर

इजहार करने में कभी देर ना करना

आज सभी आशिकों के लिए मैं यही पैग़ाम हूँ लाया

मैंने जब दिल से पूछा कि जाना कहाँ है तो तेरे शहर का ख़्याल आया