मैंने जब भी तुमको प्यार से पुकारा, तूने मुझसे कर लिया किनारा
किसी को पाने की चाहत मैंने भी की थी
किसी को प्यार भरी चिठियाँ भी लिखी थी
पर मेरे लिखे खतों का कभी ना जवाब आया
बस एक दिन आंसुओं का एक ऐसा सैलाब आया
जिसमे बह गयी जीवन की हर हंसी और ख़ुशी

चेहरे की मुस्कान को अपने साथ ही ले गया कोई
जीने की वजह कोई मुझसे पूछे तो क्या बताऊँ मैं
कहीं तेरे इश्क़ के गम में ना डूब जाऊँ मैं
आज बरसों बाद मिले तो तुम्हारे होठों पे किसी और का नाम था
तुम्हे हर कोई ढूंढ़ता है पर मेरा पता हमेशा ही गुमनाम था
जब भी देखता हूँ किसी को प्यार करते हुए तो हैरत होती है
तुमने तो मुझे दूर ही रखा जब मैंने किया पास बुलाने का इशारा
मैंने जब भी तुमको प्यार से पुकारा, तूने मुझसे कर लिया किनारा

आज का मौसम बहुत सुहाना है चलो कहीं घूम कर आते है
दूर से गुजरने वाली खुशियों को अपने घर पर ले आते हैं
पर मुझे पता हैं कि तुम फिर से बना दोगी ना मिलने का बहाना कोई
कभी-कभी लगता हैं कि जैसे किस्मत हैं मेरी कहीं पर खोई
क्या करूँ मैं इन नग्मों का अगर तुम साथ नहीं हो
किसको सुनाऊँ अपने दिल की बात अगर तुम ना हो तो
दिल को सरल भाषा में समझाना बहुत ही कठिन हैं
ये दिल हैं कि मेरी सुनता ही नहीं बस तेरा नाम लेकर धड़कता हैं
आशिक़ों के लिए ये दुनिया हर रोज़ एक नया फरमान सुनाती हैं
फिर भी ये बेचैन दिल की धड़कन एक नया अरमान जगाती हैं
तेरा इश्क़ हैं या फिर कोई सजा हैं जिसको भुगत रहा हूँ मैं
बाहर से हँसता हूँ पर अंदर से आग के शोलों सा सुलग रहा हूँ मैं

तुमने बंद कर लिया अपने घर का दरवाजा, मैंने जब भी तुझको पुकारा
मैंने जब भी तुमको प्यार से पुकारा, तूने मुझसे कर लिया किनारा
जब भी सुनता हूँ मैं तेरे किस्से गैरों की ज़बानी
तो याद आ जाती हैं तेरी बेवफाई से भरी कहानी
इतना बेवफा कोई भला कैसे हो सकता हैं
मुझे जगा कर भला कैसे चैन से वो सो सकता हैं
दिल की हर एक टीस पर बस तेरा ही नाम लिखा हैं
तुम आओगे एक दिन इसलिए मैंने घर अपना संभाल कर रखा हैं

कभी-कभी सोचता हूँ कि ख्याल तेरा इस दिल से निकाल दूँ
और अपनी बिखरी हुई ज़िन्दगी को कुछ तो संभाल लूँ
मैंने बहुत बार तेरी याद में जागकर रात गुज़ारी हैं
कभी ना मिल पाएंगे हम, क्या यही तक़दीर हमारी हैं
करना तो बहुत कुछ चाहता हूँ मैं पर कुछ कर नहीं पा रहा
ये जुदाई का मीठा-मीठा दर्द हैं मुझको सता रहा
चलो एक बार फिर से तुम्हे एक प्यार भरा खत लिखता हूँ
क्या पता इस बार शायद तुम मेरी उम्मीद को ज़िंदा रख लो
मुस्कुराना चाहो अगर मेरी बदकिस्मती पर तो मुझे बुरा नहीं लगेगा

मुझे नहीं पता कि आखिर क्या हैं तुम्हारी मजबूरी
आखिर क्यों बना रखी हैं तुमने मुझसे ये दूरी
मैं तो जब भी दुखी हुआ हूँ, तुमने मुझे कभी नहीं दिया सहारा
मैंने जब भी तुमको प्यार से पुकारा, तूने मुझसे कर लिया किनारा
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