मैंने तुम्हे अब अपना बनाने की कसम खाई है
जिंदगी मुझे ये किस मोड़ पर ले आई है
अच्छी भली कट रही थी मेरी ज़िन्दगी मस्ती में दोस्तों के साथ
जब से तुम्हे देखा है दिल को जैसे रोग ही लगा लिया
लोग इसको प्रेम रोग कहते हैं जब से पता चला है

तो मैं सोचता हूँ कि अब मेरा ना जाने क्या होगा
कहीं ये मेरी मोहब्बत एकतरफा तो नहीं
आज तक तुमने तो कभी मुझे अपना कहा नहीं
कैसे पता लगाऊं कि तुम भी मुझे चाहती हो कि नहीं
दिन रात मैं बस यही सोचता रहता हूँ
तेरे ही ख्यालों में जैसे मैं क़ैद हो गया हूँ
मैंने अपना हाल ऐ दिल खत में लिख कर भेज दिया तुझको

देखते हैं कि तेरा क्या जवाब आता है
अगर मुझसे मोहब्बत हो तो तुम मिलने आ जाना मुझसे
बहुत सी हैं दिल की बातें जो कहनी हैं मुझे तुझसे
मैंने भी अब दुआओं में ख़ुदा से तुम्हे माँग लिया है
ये हवा तुझे छूकर तेरे आने का पैगाम लायी है
मैंने तुम्हे अब अपना बनाने की कसम खाई है
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