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मैं तुम्हे चाहता हूँ दिल से ये कैसे बताऊँ तुझे

मैं तुम्हे चाहता हूँ दिल से ये कैसे बताऊँ तुझे

तुम्हे देखते ही मेरे लब खामोश हो जाते हैं

दिल मेरा धड़कने लगता है बहुत ज़ोर से

जब तुम देखती हो मेरी तरफ प्यार से

मैं काबू नहीं रख पता अपने अरमानों पर

तुमने जो कल मिलने का वादा किया है मुझसे

मुझे तो आज रात नींद नहीं आएगी कसम से

तुम्हारे दिए रुमाल को मैंने आज भी संभाल के रखा है

सोचता हूँ कि गुलाब पर रखकर अपना दिल तुम्हे दे दूँ

क्या तुम भी मेरे प्यार के अहसास को महसूस करती हो

बहुत इंतज़ार कर लिया मैंने अब तक तुम्हारा

अब तो बस तुमसे मिलकर अपना इजहार ऐ मोहब्बत कर दूँगा

तेरे दिल कि तुम जानो पर मैं तो तुमसे बेइन्तेहाँ प्यार करता हूँ

मैं तुम्हे चाहता हूँ दिल से ये कैसे बताऊँ तुझे