याद तेरी मुझे जीने नहीं देती है
जब भी मैं तन्हा होता हूँ
तो मेरे आसपास तेरी जुल्फों के साये होते हैं
कभी जो तुम मुस्कुरा देती हो मेरे ख़्वाबों में
तो दिल मेरा कुछ देर के लिए बहल जाता है

अब ना कहीं पर चैन है और ना ही सुक़ून
कट रही है ये ज़िन्दगी यूँ ही तेरे ख्यालों में
तेरी तस्वीर को सीने से लगा कर रखता हूँ
तेरी ही याद के सहारे अब तक ज़िंदा हूँ
कभी जो याद आए मेरी तो आ जाना ऐ दोस्त

तुम जहाँ छोड़ गए थे मुझे मैं आज भी तेरा इंतज़ार करता हूँ
मैं तुझे कल भी प्यार करता था और आज भी करता हूँ
दिल मेरा रहता हैं बेचैन तेरे बिन और मैं ये कहता हूँ
याद तेरी मुझे जीने नहीं देती है
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