ये दुनियाँ भी कितनी अजीब है दोस्तों इसको समझना बड़ा ही मुश्किल है
जिसका भी मतलब निकल गया है मुझसे उसने मुझे दिल से निकाल दिया
लोग यहाँ पर मौसम की तरह से रंग बदल जाते हैं
ज़रूरत के हिसाब से ही लोग आप से वास्ता रखते हैं
काम पड़ने पर लोग आप से कोई ना कोई रिश्ता निकाल लेते हैं
अगर आप किसी के काम के हैं तो ही आप ख़ुशक़िस्मत हैं
क्योंकि जब किसी के काम के नहीं रहे तो ये दुनियाँ भूल जाती हैं
एक अजीब सी सोच का शिकार हो गया हैं आदमी आजकल
ना कोई एहसास ही बचा और ना ही कोई अपनापन
किस पर यकीन करें इस रंग बदलती दुनियाँ में
अच्छा तो यही होगा कि हम भी अपने काम से ही काम रखें
जब आप कुछ भी नहीं होते तो तानें मारते हैं लोग
और जब कुछ बन जाते हैं तो जलने लगते हैं लोग
गम कि गहराइयों में कभी मत उतर जाना यहाँ पर
लोग आपके डूबने का तमाशा देखने को बेकरार हैं
किसी की कितनी भी इज्जत कर लो पर कहते हैं कि जाहिल हैं
ये दुनियाँ भी कितनी अजीब है दोस्तों इसको समझना बड़ा ही मुश्किल है
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