ये सड़क पर दौड़ती हुई ज़िन्दगी ना जाने किधर जा रही है
ये हुसन और ये जवानी ना जाने किधर जा रही है
घर से निकल जाते है लोग सुबह होते ही अपने काम की तलाश में
कुछ शाम को मायूस लौटते है तो कुछ की आँखों में चमक होती है
घर कैसे चलेगा बस यही चिंता दिन रात रहती है
कभी माँ तो कभी बीवी बस मुझसे यही सवाल करती है
महंगाई और बेरोजगारी में जेब सभी की ख़ाली है
बहुत से हैं यहाँ पर फरियादी तो कुछ सवाली हैं
पर ज़िन्दगी कहाँ किसी के सवालों का जवाब देती हैं
ये वक़्त की मार तो सब पर एक जैसी ही पड़ती हैं साहब
कल कुछ अच्छा हो जायेगा सब को यही उम्मीद लगी रहती हैं
ख़ैर दिल बहलाने को ये ख्याल अच्छा हैं दोस्तों
कब तक यूँ वक़्त और हालात को कोसते रहोगे
तुझे कुछ तो करना ही पड़ेगा अपने सपने पूरे करने के लिए
तुझे पुकारती हैं तेरी ये राहें जिनपर तू चलता हैं हर रोज़
आधे अधूरे मन से काम करने से कामयाबी हांसिल नहीं होती
तुझे करना होगा इरादा पक्का वर्ना ज़िन्दगी ये तेरी बिखर जा रही हैं
ये सड़क पर दौड़ती हुई ज़िन्दगी ना जाने किधर जा रही है
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