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रुकी रुकी सी इस ज़िन्दगी को मैं फिर से चलाना चाहता हूँ

रुकी रुकी सी इस ज़िन्दगी को मैं फिर से चलाना चाहता हूँ

तेरे साथ मैं फिर से कदम से कदम मिलाकर चलना चाहता हूँ

जब से तेरा साथ छूट गया तब से मैं तनहा और उदास हो गया

दिल मेरा ना जाने क्या चाहता है तुझसे ऐ ज़िन्दगी

सोचता हूँ कि कहीं दूर चला जाऊ खुद की तलाश में 

सागर की लहरें बुलाती हैं मुझको कभी कभी यूँ ही

सोचता हूँ कि किनारे पर मैं अपने कदमों के निशान ढूंढ लूँ

बैठा रहूँ बस ऐसे ही और देखता रहूँ डूबते हुए सूरज को

ये डूबता हुआ सूरज कहता है कि कल फिर आऊंगा

नई उम्मीद और नयी रोशनी के साथ दुनिया में उजाला करने

इस बात ने मुझको भी तस्सली दी है एक सुनहरे कल के लिए

नदियाँ के उस पार कोई बुलाता है मुझे मिलने को बड़े प्यार से

इश्क़ की आवाज लगती है ये पर मैं तो तैरना भी नहीं जानता

पर फिर भी उस पार तो जाना ही है मुझको किसी से किया वादा निभाने को

वादा जो किया था हमने उनसे हर हाल में मुलाक़ात करने का

अब या तो डूब जायेंगे या तैरना सीख़ लेंगे तेरे इश्क़ में

कम से कम इस मझदार से तो निकल जाएगी मेरी ये बेचैन ज़िन्दगी 

अब मैं एक नयी ज़िन्दगी की तरफ अपना हाथ बढ़ाना चाहता हूँ

रुकी रुकी सी इस ज़िन्दगी को मैं फिर से चलाना चाहता हूँ