वक़्त से कुछ वक़्त उधार मांगकर कभी तो मुझसे मिलो तुम
मिलोगे जब तुम तो बताएँगे तुमको कि कितना प्यार करते हैं
ये प्यार इश्क़ और मोहब्बत तो सभी करते हैं ज़माने में
पर हमने तो तुमको चाहा है ज़िन्दगी से भी ज्यादा
जब कभी ग़म की तन्हाई सताती है हमें

तो पहले से और भी ज्यादा तेरी याद आती है हमें
मुझे जीने नहीं देती है ये याद तेरी ना जाने तुम कब आओगे
परदेस गए थे तुम कुछ दिन बाद लोट आने की कहकर
ये राहें आज भी राह तेरी देख रही है
वो तेरा मिलना पल तो पल का हमको दीवाना कर गया
दिल्लगी ही दिल्लगी में मेरा तो दिल गया
तुम रहो सलामत हमेशा और हुसन तुम्हारा बरकरार रहे

तुम चाहे कहीं भी रहो पर दिल में तुम्हारे हमारा प्यार रहे
दुनिया जब सो जाती है तो आशिक़ कहाँ सो पाते हैं
मैं भी तेरे मिलने की आस में जागता रहता हूँ रातों में
मेरे इस मुरझाये जीवन में फूल बन कर कभी तो खिलो तुम
वक़्त से कुछ वक़्त उधार मांगकर कभी तो मुझसे मिलो तुम
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