सागर की ये लहरें जब साहिल से टकराती है तो मेरे दिल को तेरी याद आती है
एक दिन तुम मिले थे मुझको इसी सागर के किनारे
तुम्हारे क़दमों के निशान आज भी रेत पर मौजूद हैं
मैं जब भी इस जगह पर आता हूँ तो पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं
कभी हम यहाँ पर सूरज को उगते और ढलते हुए देखते थे एक साथ
ज़िन्दगी भी मेरी कुछ ऐसे ही उतर चढ़ाव से भरी पड़ी है आजकल

वो ठंडी हवा का झोंका जो तेरी जुल्फों को उलझा जाता था कभी
आजकल मैं अकेले ही इस मौसम में तेरा इंतज़ार करता रहता हूँ
तुम तो मुझे यहाँ पर छोड़कर ज़िन्दगी में आगे बढ़ गए हो
ना जाने क्या खता हो गयी थी हमसे जो तुमने नज़रे चुरा ली
ज़िन्दगी को मेरी अब ये सागर, साहिल और पानी रास नहीं आते
बिना तेरे मेरे हमदम ये सब नज़ारे सूने सूने से लगते हैं

कभी जो खिलखिला कर हँसते थे हम आज मैं मुस्कुराने को भी तरस गया हूँ
अब तो बस जीवन में मेरे तेरी याद है और मीलो तक तन्हाई है
जब भी कोई कश्ती मैं देखता हूँ तो तेरे आने की उम्मीद बन जाती है
सागर की ये लहरें जब साहिल से टकराती है तो मेरे दिल को तेरी याद आती है
Amazon Link to Buy Book:
