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सावन के इस महीने में झूले पड़े है बाग़ में

सावन के इस महीने में झूले पड़े है बाग़ में

मैं परदेसी भी अब घर वापिस आ गया हूँ

इस मौसम के क्या कहने कि हर तरफ छायी बहार है

पेड़ों पर नए पत्ते और फूलों पर आया एक प्यारा सा नूर है

कोयल भी अपनी मीठी आवाज़ में कूँ कूँ कर रही है

गीत गा रहे हैं भँवरे फूलों पर और खिल रही है कली कली

ये बहते हुए झरनों का मधुर संगीत कानों में रस घोल रहा है

कब से प्यासी ज़मीन पानी के लिए तरस रही थी

आज आया है सावन झूम के और सारा समां सुहाना हो गया है

दिल मेरा अब कह रहा है तेरे दिल से अपने दिल की बात 

इस हसीन मौसम में अब काबू मैं नहीं हैं मेरे ये जज्बात

आओ हम दोनों बारिश की इन बूंदों में भीग जाये एक साथ

इस आशिक़ाना मौसम में मुझे आज तुझसे यही कहना है

अब मुझे इस दुनिया में नहीं बस तेरे दिल में ही रहना है

तुम यूँ ही पास मेरे बैठी रहो और बारिश ये प्यार भरी कभी ना रुके

सावन के इस महीने में झूले पड़े है बाग़ में