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सुना है कि मिलती है हर दर्द की दवा तेरे शहर में

सुना है कि मिलती है हर दर्द की दवा तेरे शहर में

हम भी हो गए हैं हाज़िर अपना ये ज़ख़्मी दिल लेकर

जब मेरा ये इश्क़ का जूनून हद से भी पार हो जायेगा

तो शायद उस दिन तुमको भी हमसे प्यार हो जायेगा

क्यों रोता फिरूंगा मैं कभी यहाँ तो कभी वहां पर

अगर मुझे दामन तेरा मिल जायेगा अपना दिल बहलाने को

अब तो हाल ये है कि गम से दूर भागना ही छोड़ दिया है

क्यूंकि मेरी उम्मीद है तूँ और मेरा सहारा है तूँ 

कोई रिश्ता बनाकर उसे छोड़ देना नहीं अच्छा

मोहब्बत की आजमाइश तो ताउम्र रहती है

कहीं ऐसा ना हो कि वक़्त के साथ तूँ भी बदल जाये

नए ख्वाबों को कैसे सजा लूँ मैं अपनी आँखों में

मेरे दिल में तो बस तेरा ही पता और ठिकाना है

सुना है कि मिलती है हर दर्द की दवा तेरे शहर में