सोच रहा हूँ कि मेरी हर साँस तेरे नाम कर दूँ
आखिर कब तक मैं यूँ ही तनहा रहूँगा
चलते चलते अब तो रास्ते भी थक चूके हैं
ना जाने मेरे इस सफर का अंजाम क्या होगा
तुम्हारा चेहरा तो गुलाब से भी बढ़कर है

पर मेरी ज़िन्दगी में तो बस काँटे ही हैं
तेरी नज़र तीर बनकर इस दिल पे लगी हैं
ज़ख्म दिया है तो मरहम भी तुम ही लगाओगे
ये सावन का मौसम आज फिर शोले बरसा रहा है
तुम्हारा साथ ही अब कुछ सुकून पहुंचा सकता है
वैसे तो सब इंतज़ाम है तुझे अपना बनाने का

पर तुम भी इकरार करो तो कुछ बात बने
मर्ज़ी अब तुम्हारी है अपना लो या ठुकरा दो
हो सकता है तेरी याद में ये ज़िन्दगी मैं तमाम कर दूँ
सोच रहा हूँ कि मेरी हर साँस तेरे नाम कर दूँ
Amazon Link to Buy Book:
