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हाल मेरे दिल का जो तुम ना सुनोगे तो कौन सुनेगा

हाल मेरे दिल का जो तुम ना सुनोगे तो कौन सुनेगा

तुझे छोड़ कर अब किस के दर पर जाएं हम

मेरी लाज़ भी अब बस तुम्हारे ही हाथ है

वक़्त से माँगा उधार मैंने तेरा मेरा साथ है

अगर आपकी नज़र ए करम हम पर आज हो जाए

तो काँटों भरी ये ज़िन्दगी गुलाब की तरह से खिल जाए

अगर ऐसा हो जाए तो मुक्कदर पर मुझे अपने नाज़ हो

बन गया हूँ मैं गुलाम बस आपकी ही चाहत का

तेरे बिना नहीं निकलता कोई रास्ता मेरी राहत का

अब क्यों किसी और के दर की तलाश करूँ मैं

जब अपना सब कुछ मैंने आपको ही माना है

तेरा ये नूरानी चेहरा हर वक़्त मेरी आँखों में रहता है

बना लो मुझको अपना मेरा ये दिल तुमसे कहता है

तुमसा कोई दूसरा हसीन आजतक मैंने तो देखा नहीं

जो राह तुम तक ना पहुंचे मैं तो उस पर चलता नहीं

अब कैसे कह दूँ कि मेरे दिल में इश्क़ तेरा पलता नहीं

अब मेरा तो जीना और मरना बस तेरी ही मर्ज़ी पर है

कहीं ऐसा ना हो कि मेरा दम निकले तेरी ही चौखट पर

अब हम कहाँ सरकार जाएं आपके होते हुए

जब आवाज़ किसी ने भी नहीं सुनी कभी मेरी

तो आप ही बताओ कि कौन मेरा ये मौन सुनेगा

हाल मेरे दिल का जो तुम ना सुनोगे तो कौन सुनेगा