You are currently viewing दिल से पूछ लो ज़रा इस दिल को कहीं लगाने से पहले

दिल से पूछ लो ज़रा इस दिल को कहीं लगाने से पहले

दिल से पूछ लो ज़रा इस दिल को कहीं लगाने से पहले

आज मैं उनको अपना बनाने की फ़िराक में हूँ

सुना हैं कि चाहत की राहें काँटों से भरी होती हैं

आशिक़ों की दुनियाँ में हमेशा अँधेरा ही अँधेरा रहता हैं

नहीं देता कोई भी साथ मोहब्बत के सफर में

दीवाना अकेला ही इस तन्हा मंज़र को पार करता हैं

ऐसा नहीं हैं कि हमें शौक नहीं महलों का

पर तेरे प्यार के आगे ये धन-दौलत कुछ भी नहीं

कोई तो पहुँचा दे मेरा ये पैगाम उनके घर तक

कि दिल मेरा चुरा लिया हैं उसने और बात कुछ भी नहीं

ख्यालों से भरी मेरी इस हसीन दुनियाँ का राज़ बस यही है

एक बार देखा था उन्होंने मुस्कुरा कर मुझे बरसों पहले

उनके दीदार के इंतज़ार का ये आलम है आज भी दुनियाँ वालों

उनके आने के वादे पर कट रही है ये ज़िन्दगी मेरी

बस इंतज़ार की हद है और मुलाकात कुछ भी नहीं

दिल मेरा तोड़कर वो कहते हैं मुझसे आज बरसों बाद

कि पहले कुछ सोचा क्यों नहीं अपने दिल को लगाने से पहले

दिल से पूछ लो ज़रा इस दिल को कहीं लगाने से पहले