कभी-कभी कुछ यूँ उलझ जाते है इस ज़िन्दगी में हमारे कुछ करीबी रिश्ते

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नमस्कार दोस्तों,

आज मैं आप सभी से अपने दिल की कुछ ख़ास बातें इस कविता के माध्यम से करना चाहता हूँ

मैं यह आशा करता हूँ कि आपको मेरी ये कोशिश शायद पसंद आएगी

आप जब इस कविता को पढ़ेंगे तो आपको भी लगेगा कि ये कविता आपके दिल के जज़्बात को बयान कर रही है

तो मेरे चाहने वालों को मैं मेरी ये कविता पेश कर रहा हूँ

मेरी कविता का शीर्षक है “कभी-कभी कुछ यूँ उलझ जाते है इस ज़िन्दगी में हमारे कुछ करीबी रिश्ते”

कभी-कभी कुछ यूँ उलझ जाते है इस ज़िन्दगी में हमारे कुछ करीबी रिश्ते

कि लाख कोशिश करो सुलझाने की पर सुलझ नहीं पाते बल्कि और उलझ जाते हैं

उलझने की ये शुरुआत कहाँ से शुरू हुई ये कहना तो शायद मुश्किल है

कभी लगता है कि उसने बेवफाई की तो कही लगता है कि शायद मैं वफ़ा नहीं कर पाया

ऐसा भी नहीं है कि उसने हमें मानाने की कभी भी कोशिश नहीं की

पर जब वो आयी तो शायद देर बहुत हो चुकी थी और हालात भी काफी बदल चुके थे

मैं तो तुझपे हर पल खुद से भी ज्यादा भरोसा करता था

सोचा था कि इस बेदर्द दुनिया से दूर एक नया आशियाना बनाऊंगा

जिसमे बस एक तुम होगी और और एक मैं ही रहूँगा

दिल के जज्बात भी ना जाने कैसे बेबस हो जाते हैं अक्सर

जिन राहों पर मैंने कभी पलकें बिछाई थी आज मैं देखना भी पसंद नहीं करता

ऐसा नहीं है कि मैं आजकल पत्थर-दिल हो गया हूँ और मुझमे कोई जज्बात नहीं

बस बात इतनी सी है कि अब मैं किसी के बहकावे में नहीं आता

बहुत लूटा है इस शहर वालों ने मुझे अपने रिश्तों का हवाला देकर

जब मैं पहली बार इस शहर में आया था तो बहुत ही मासूम और बेखबर था

वक़्त ने मुझे कुछ तज़ुर्बा दिया और मेरी मासूमियत ही छीन ले गया

हमें तो उन्होंने भी लूटा जो खुद को बताते थे इंसानियत के फरिश्ते

कभी-कभी कुछ यूँ उलझ जाते है इस ज़िन्दगी में हमारे कुछ करीबी रिश्ते

एक बार एक हसीना ने बारिश के मौसम में हम से पूछा था

कि क्या आप मुझे आज अपनी कार में घर छोड़ देंगे प्लीज

उसकी इस प्यार भरी अदा मेरा तो दिल ही बेचैन हो गया

फिर जब समय आया उनको अपनी गाड़ी में तो दिल पे रहा ना काबू

मत पूछो यारों कि कितनी बार मेरे दिल के अरमान हुए बेकाबू

मैं ये फैसला भी नहीं कर पा रहा था कि नज़र उसपर रखूँ या फिर सामने सड़क पर

इस माहौल में बारिश की बूंदे भी मेरे दिल से टकराकर उस हसीना को चूम रही थी

और कुछ देर के बाद उसका घर भी आ गया और वो गाड़ी से उतर कर चली गयी

ना कोई वादा किया फिर से मिलने का मुझसे बस वो तो चली गयी हँसते-मुस्कुराते

कभी-कभी कुछ यूँ उलझ जाते है इस ज़िन्दगी में हमारे कुछ करीबी रिश्ते

आज बरसों बाद देखा है उस हसीना को एक बार फिर से किसी और के साथ

दोनों घूम रहे थे कल शाम को हाथों में डाले हाथ

फिर मैंने सोचा कि चलो इन दोनों की भी जोड़ी बन गयी

पता नहीं वक़्त को क्या है मंज़ूर, क्यों नहीं मिलता मुझे कोई हमसफ़र

क्या मुझे कोई हक़ नहीं है प्यार करने का और मुस्कुराने का

गुजरते हुए वक़्त के साथ मेरी उम्मीद लगातार कम होती जा रही है

आज अकेले में बस इन कमरे की छत को ही घूर रहा हूँ

और आएगा भी कौन मेरे पास अकेले में इस तन्हाई में

पुरानी यादों और आज की तन्हाई की चक्की में हरदम मेरे अरमान रहे हैं पिसते

कभी-कभी कुछ यूँ उलझ जाते है इस ज़िन्दगी में हमारे कुछ करीबी रिश्ते

फिर कुछ दिन बाद मेरी ज़िन्दगी में जैसे एक नया मोड़ आया

कोई था जिसको हमसे मिलने का ख्याल था आया

कोई रहने आयी थी हमारी गली के एक मकान में रहने के लिए

दोपहर का वक़्त था और किसी ने मेरे घर का दरवाजा था खटखटाया

उसने पूछा कि क्या थोड़ी सी चीनी मिल सकती है प्लीज

मैं पहले तो उसको देखता ही रह गया और फिर चीनी से भरा कप उसको थमा दिया

उसने कहा कि मैं चाय बना रही हूँ आप भी आ जाओ दोनों मिलकर पीते हैं

मैंने धीरे से हाँ भर दी और कुछ देर बाद उसके घर का दरवाज़ा खटखटा दिया

वो शाम का वक़्त था और चाय के कप के साथ हम दोनों एक दूसरे को देख रहे थे

उसने पूछे कि क्या तुम भी मेरी तरह रहते हो अकेले

मैंने भी हाँ भर दी और सुना दी अपने अकेलेपन की दास्तान

फिर उसने कहा कि हम किस्मत से आज मिले हैं एक-दूजे से ये इत्तेफ़ाक़ नहीं हो सकता

धीरे-धीरे हम रोज़ मिलने लगे इश्क़ की हसीन गलियों में

ना जाने कब हम एक-दूसरे के इतना करीब आ गए हमें तो पता ही ना चला

एक दिन उन्होंने मुझको गुलाब देकर अपना बना लिया हँसते-हँसते

कभी-कभी कुछ यूँ उलझ जाते है इस ज़िन्दगी में हमारे कुछ करीबी रिश्ते

दोस्तों, ज़िन्दगी चलती रही यूँ ही हमारी एक-दूजे के साथ

फिर एक दिन हमने मौका देखकर सदा के लिए मांग लिया उनका हाथ

मुझसे शादी करोगी जैसे ही कहा मैंने तो वो तो शरमा ही गए

गुलाबी हो गए थे गाल उनके और आँखें भी कुछ थी झुकी-झुकी सी

फिर क्या था हम दोनों ने कर ली थी शादी और हो गए एक-दूजे के

जब वो अरमानों से भरी रात आयी तो फिर से याद कर लिए हमने पुराने किस्से

कभी-कभी कुछ यूँ उलझ जाते है इस ज़िन्दगी में हमारे कुछ करीबी रिश्ते

कुछ दिन जब गुजरे तो हमें लगा कि वो कुछ परेशान सी लग रही थी

मैंने पूछा क्या बात है किस बात पे ये तुम्हारे चेहरे पर आयी है उदासी

उसने हिचकिचाते हुए कहा मुझसे कि ऐसी तो कोई बात नहीं

पर मैंने आखिर उससे उदासी का राज़ जान ही लिया

जैसे ही पता चला मुझको कि मुझसे पहले वो किसी और करती थी प्यार

मेरे पैरों के निचे से तो जैसे ज़मीन ही निकल गयी थी मेरे यार

फिर मैंने पूछा उसको कि अब तुम्हारा क्या है फैंसला किसके साथ रहना है

उसने कहा कि माफ़ कर देना मुझको मैं जा रही हूँ तुम्हे छोड़ कर हमेशा के लिए

रात-रात भर यूँ ही जागता रहता हूँ मैं और मेरे दिल के ये घाव हमेशा रहते हैं रिसते

कभी-कभी कुछ यूँ उलझ जाते है इस ज़िन्दगी में हमारे कुछ करीबी रिश्ते

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