खिड़की से जो आ रही है हल्की-हल्की सी रोशनी, शायद मेरे दिन बदलने वाले हैं

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खिड़की से जो आ रही है हल्की-हल्की सी रोशनी, शायद मेरे दिन बदलने वाले हैं

इस सफर की शुरुआत करने से पहले मैंने अपने मन को समझाया था

कि ये सफर बहुत ही कठिनाईओं से भरा होगा जिसमे चलना होगा दिन-रात

कभी-कभी ऐसा लगेगा कि बस अब और नहीं सहा जाता

और चलते-चलते ये पाँव थक जायेंगे और मंज़िल कहीं दूर तक नज़र नहीं आएगी

मेरी ये बातें आजतक मैंने कभी तक किसी को नहीं बताई

क्योंकि सुना है कि लोग बहुत मज़ा लेते हैं किसी के बुरे वक़्त में होने के हालात का

बस ये टीस अपने भीतर ही समेट कर रखी है

जीना हुआ है मुश्किल और ये होंठ मैंने सी रखें हैं

फिर भी मैंने सब कुछ भूलकर जीने की ठानी है

मैंने अभी तक हार तो नहीं मानी है

कुछ देर ठहरने के बाद मैंने फिर से अपना सफर शुरू कर दिया है

उम्मीद का दीया अभी है रौशन और जीत की खातिर मेरे अरमान एक बार फिर से मचलने वाले हैं

खिड़की से जो आ रही है हल्की-हल्की सी रोशनी, शायद मेरे दिन बदलने वाले हैं

चलना है ज़रूरी चाहे जैसे भी हो मेरे लिए आज का मौसम

अभी तो हैं ये काले-काले बादल आसमान पर राज कर रहे हैं 

शायद ये बादल आज धरती को पानी से सराबोर कर देना चाहते हैं

मैंने भी तो बहुत दिनों से बारिश की बूंदों का स्वाद नहीं चखा है

आज जब ये मूसलाधार बारिश हो रही है तो इसका रुकना मुश्किल है

सोचता हूँ कि कब ये रुकेगी और कब मैं जा पाउँगा नदिया के उस पार

मेरे पास नदी पार करने को एक छोटी सी नांव है

पर क्या ये मेरी नाज़ुक सी नांव इन लहरों के थपेड़े सह पायेगी

घर पर सभी कुछ चिंतित से लगते है मेरे बारे में सोचकर

कि मेरी घर वापसी कब तक हो पायेगी

मुझे इंतज़ार है एक ऐसे नाविक का जो ये कहे कि अब हम जल्दी ही यहाँ से निकलने वाले हैं

खिड़की से जो आ रही है हल्की-हल्की सी रोशनी, शायद मेरे दिन बदलने वाले हैं

मेरा जो जिंदगी का मकसद है वो दूसरों से ज़रा हटकर है

मैं करना चाहता हूँ कुछ ऐसा जो सभी के लिए हंसी और ख़ुशी लेकर आये

ये दुनिया बड़ी अजीब है कि इसमें कहीं मातम पसरा है और कहीं पर लगे मेले हैं

मैं देना चाहता हूँ सहारा उनको जो ज़िन्दगी के सफर में अकेले हैं

जब भी मुझको लगता है कि ज़िन्दगी मुझ पर कुछ बेरहम सी है

तो मैं अपने चारों तरफ लोगों को देखता हूँ इस ज़िन्दगी से ज़द्दोज़हद करते हुए

दूसरों के गम देखकर मुझे ये एहसास हुआ कि मेरा गम कितना कम है

अब मेरा ज़िन्दगी को देखने का नज़रिआ कुछ बदल सा गया है

जो भी मिला है उसी को पाकर खुश रहता हूँ और शुक्रिआ अदा करता हूँ

ज़िन्दगी ने जो ये नया पाठ मुझे पढ़ाया है मैं इसको कभी नहीं भुला सकता

कल क्या होगा ये सोचकर मैं अपने आज की खुशियों को सूली पर नहीं चढ़ा सकता

मैंने अपने घर के बगीचे के पौधों को आज फिर से पानी दिया है

शायद मेरे प्यार भरे अरमानों के फूल इन्ही कलियों से खिलने वाले हैं

खिड़की से जो आ रही है हल्की-हल्की सी रोशनी, शायद मेरे दिन बदलने वाले हैं

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