ज़िन्दगी जब भी तेरे शहर की ओर ले जाती है मुझे, हर चीज़ बड़ी रंगीन नज़र आती है मुझे
तेरी कही हर एक बात याद आ जाती है मुझे
सोचा था कि चला जाऊंगा तेरी याद और तेरे शहर से बहुत दूर
पर शायद किस्मत को तो है कुछ और ही है मंज़ूर
जब भी तेरे शहर को छोड़ कर किसी और शहर में मैं आया हूँ
सच कहता हूँ कि एक दिन भी मैं चैन से सो नहीं पाया हूँ
ऐसा क्या रखा है तेरे शहर में कि मैं इससे से दूर नहीं जा सकता
ख़ैर तुमको मैं याद तो कर सकता हूँ, ये माना कि मैं तुमको पा नहीं सकता
तेरी यादों ने सीखा दी है शायरी मुझको
हर वक़्त तेरे हुसन की शान में लिखता रहता हूँ
चलने से ही दूर होंगे आपस के ये फासले
थोड़ा मैं चलूँ और थोड़ा तुम भी चलो
चलते-चलते इन राहों में तेरी तस्वीर तेरे घर की ओर खींच लाती है मुझे
ज़िन्दगी जब भी तेरे शहर की ओर ले जाती है मुझे, हर चीज़ बड़ी रंगीन नज़र आती है मुझे
चलने की अगर जिद है मेरी तो चलना ही होगा चाहे जो हो अंजाम
इश्क़ अगर आग का दरिया है तो जलना ही होगा, चाहे हो जाये काम तमाम
तेरी आँखों के आँसू मैं कभी देख सकता नहीं ये जानती हो तुम
तेरी एक मुस्कान के लिए मैं कर सकता हूँ लाखों जतन
महफ़िल में तेरी आज मैं आया हूँ सिर्फ तेरे कहने से
मौका भी अच्छा है आज, चलो इजहार-ए-इश्क़ करदे सबके सामने
मैं तेरी मस्त निगाहों से कुछ देर बात करना चाहता हूँ
पता नहीं मेरे नसीब में फिर कब दोबारा तुमसे मुलाकात हो
होश में रहने का शौक अब मुझे नहीं है मदहोश हूँ मैं
मेरे घर तक मुझको पहुंचाने का जिम्मा आज तुम पर है
माफ कर देना अगर कोई हसीन खता हो जाये मुझसे तो
मेरे सर पर तुम्हारे प्यार का जूनून है सवार आजकल
जिस गली से भी मैं गुजरता हूँ, तेरे बदन की खुशबू आती है मुझे
ज़िन्दगी जब भी तेरे शहर की ओर ले जाती है मुझे, हर चीज़ बड़ी रंगीन नज़र आती है मुझे
वो मासूम सा चेहरा तेरा मैं चाह कर भी नहीं भुला सकता
चाहे नींद हो मेरी इन आँखों में पर मैं चाह कर भी खुद को सुला नहीं सकता
आज रात मिलने का वादा किया है तुमने और मुझे तुमसे मिलने का इंतज़ार है
तेरा इंतज़ार करते हुए तुझे याद करना, बस यही सब देता मेरे दिल को करार है
ये तो हो नहीं सकता मैं तुझे याद ना करूँ
तेरी चाहत ही अब मेरी ज़िन्दगी बन गयी है
चैन मुझे तुम-बिन अब कहीं भी आता नहीं
क्या करूँ मैं कि तेरे बिन अब कोई भी मेरे दिल को भाता नहीं
मैंने सुना है कि ये सब तभी होता है जब किसी से प्यार होता है
चाँद की चांदनी भी आजकल मुझको कुछ गुलाबी-गुलाबी सी लगती हैं
तेरी ये मदमस्त निगाहें भी मुझको कुछ शराबी-शराबी सी लगती हैं
तुमने जो कसम दी थी कि साथ हमारा कभी भी छूटेगा नहीं
आज क्या हुआ उस कसम का, कि आज अकेले हम हैं और अकेले हो तुम
जाग-जाग कर काट लेता हूँ मैं रातें, जब भी याद तेरी आती है मुझे
ज़िन्दगी जब भी तेरे शहर की ओर ले जाती है मुझे, हर चीज़ बड़ी रंगीन नज़र आती है मुझे
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