ज़िन्दगी में फैली है निराशा, ना जाने कब उम्मीद की कोई रोशनी नज़र आएगी
मैंने ना जाने कितनी बार कोशिश की है कुछ कर दिखने की
पर हर बार मैं तो जैसे हार कर रह जाता हूँ
क्या ब्यान करूं मैं किस्सा अपनी ज़िन्दगी का दोस्तों
ज़िन्दगी का दिया हर ज़ख्म मैं हंस कर सह जाता हूँ
पता नहीं कि कामयाबी का रास्ता किन गलियों से होकर गुज़रता है
मैंने तो जब भी कोशिश की है, मेरे तो हाथ लगी विफलता है
चलते-चलते इस जीवन के सफर में, पाँव में पड़ गए हैं छाले
बहुत कमज़ोर पड़ गयी है हिम्मत मेरी, ऐसे में कोई तो मुझे संभाले
एक-एक करके छूट गयी सभी रेलगाड़ियां और स्टेशन पर रह गया मैं अकेला
ये ज़िन्दगी है क्या, मैं तो समझ ना पाया कि आखिर ये है क्या झमेला
कभी-कभी तो लगता है कि मेरी ये ज़िन्दगी तो बस यूँ ही गुज़र जाएगी
ज़िन्दगी में फैली है निराशा, ना जाने कब उम्मीद की कोई रोशनी नज़र आएगी
माँ-बाप को थी मुझसे बहुत सी उम्मीदें, जब से मैं पैदा हुआ तबसे ही
पर मैं क्या करता, मेरे हाथ में तो कुछ भी ना था मेहनत करने के सिवा
दिन-रात मेहनत करके मैं कुछ हांसिल करने की कोशिश करता रहा
कभी तो मेरी राहों में भी फूल खिलेंगे, ये सोच कर मैं काँटों पर चलता रहा
मेरे दिल की पीड़ा को सुनने वाला तो कभी कोई नहीं मिला मुझे तो आजतक
अभी तक तो सभी ने मुझे ताने ही मारे हैं मेरी नाकामयाबी को लेकर
ये भी मैं जानता हूँ कि हथेली पर सरसों नहीं उगा करती कभी
हमें एक अच्छी फसल को काटने के लिए इंतज़ार भी करना पड़ता है
मेरा ये इंतज़ार तो खत्म होने की बजाय और लम्बा हो रहा है
इस बेदर्दी ज़माने ने कोई मौका नहीं छोड़ा मुझे नीचा दिखाने का
धीरे-धीरे मैं अब अंदर ही अंदर कुछ टूट सा रहा हूँ शायद
मेरा मन नहीं लगता अब किसी भी काम में चाहे छोटा हो या बड़ा
मैं तो बस देख रहा हूँ दूर से ही इस दुनिया को, और हूँ एक अँधेरे कोने में पड़ा
ज़िन्दगी में फैली है निराशा, ना जाने कब उम्मीद की कोई रोशनी नज़र आएगी
अब तो लोगों ने भी कहना शुरू कर दिया है कि मुझसे ना हो पायेगा
इस ग़म से भरे माहौल में कोई कैसे गीत ख़ुशी के गायेगा
मेरे दिल की ये प्यासी ज़मीन कुछ बारिश की बूंदों को तरसती है
जब भी आसमान की तरफ देखता हूँ तो बस निराशा ही हाथ लगती है
पर जबसे मैं तुमसे मिला हूँ तो फिर से एक उम्मीद सी जगी है
शायद इस बार मेरे जीवन की डगमगाती नैया हो जाएगी पार
तेरे आने से मेरे सुने पड़े इस जीवन में फिर से बहार आने को है
मेरे जीवन का बुझता हुआ दीया एक बार फिर से जगमगाने को है
अगर हाथ थामा है तुमने मेरा इस हाल में तो मेरे जीवन में खुशियां फिर से लौट आएगी
ज़िन्दगी में फैली है निराशा, ना जाने कब उम्मीद की कोई रोशनी नज़र आएगी
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