हर लम्हा जिंदगी का मुझसे कुछ कहता है, दिल मेरा अब सुकून की तलाश में रहता है

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हर लम्हा जिंदगी का मुझसे कुछ कहता है, दिल मेरा अब सुकून की तलाश में रहता है

बचपन गुज़रा मेरा बहुत ही मासूमियत से, खेल-खेल में बीता लड़कपन मेरा

कभी चलता था कागज़ की कश्ती बारिश के पानी में

तो कभी दोस्तों के साथ दूर कहीं निकल जाता था

सुविधाओं का अभाव था उस वक़्त पर ज़िन्दगी बड़े ही इत्मीनान से गुज़र रही थी

छोटे-छोटे खिलौनों से ही खुश हो जाया करते थे

अपनी छोटी सी साइकिल से ही स्कूल को जाया करते थे

बचपन के वो दोस्त आज भी मेरे दिल के बहुत करीब हैं

दिल के तो वो सभी अमीर हैं पर धन-दौलत से कुछ गरीब हैं

बचपन की वो बेफिक्री आज फिर से ढूंढ़ता हूँ मैं इस भीड़ से भरी दुनिया में

जब भी गूंजती है कहीं कोयल की आवाज़, मेरा गाँव और वो बाग़-बगीचे मुझे बहुत याद आते हैं

जल्दी से दौड़ कर पहुँच जाऊँ अपने बचपन के उस दौर में, मेरा दिल ये मुझसे कहता है

हर लम्हा जिंदगी का मुझसे कुछ कहता है, दिल मेरा अब सुकून की तलाश में रहता है

बचपन बीता और फिर जवानी ने दस्तक दी और ज़िन्दगी को रंगीन बना दिया

जवानी का पहला एहसास बहुत ही खूबसूरत और रूमानी था

जब दिन भर दोस्तों के साथ मस्ती भरी बातें और रोमांच के किस्से सुनाये जाते थे

रूठी हुई महबूबा को कैसे मनाया जाये, ऐसी मदहोश बातों को सुनकर चटकारे लगाए जाते थे

मुझे भी याद है कि कैसे मेरे दोस्तों ने मुझको पहला प्रेम-पत्र लिखना सिखाया था

सच पूछो तो वो प्रेम-पत्र मैं कभी दे ना सका क्यूंकि मैं उस वक़्त बहुत ही घबराया था

घर वाले हमेशा ही किसी ना किसी बात पर टोकते रहते थे

शायद वो ये अपने अनुभव से जानते थे कि जवानी में कदम डगमगा सकते हैं

जब स्कूल से कॉलेज में आया तो वो पहला दिन मुझे आज भी याद आता है

उस दिन मैंने जिस हसीन चेहरे को देखा था, वो चेहरा याद करके आज भी दिल मेरा मुस्कराता है

वो लाल होंठ और गोरे गालों की लाली आज भी मुझे गुदगुदा जाती है

सच कहता हूँ कि बचपन से भी ज्यादा जवानी की यादें मुझे तड़पा जाती है

कभी बचपन तो कभी जवानी के किस्सों के बीच में ही मेरा ये मन उलझा रहता है

हर लम्हा जिंदगी का मुझसे कुछ कहता है, दिल मेरा अब सुकून की तलाश में रहता है

बचपन मेरा बीत गया है और जवानी भी अब मेरी शायद ढलान पर है

अब जब भी ज्यादा चल लेता हूँ तो पाँव जैसे थकने लगे हैं

वो भी दिन थे कभी जब मैं हँसते-हँसते मीलों का सफर मस्ती में तय कर लेता था

आज पैरों में मेरी जिम्मेदारी की बेड़ियाँ हैं और सर पर है लोगों की उम्मीदों का टोकरा

इतना बोझ लेकर जीवन का, मुश्किल हो रहा है इन पथरीली राहों पर चलना

बहुत कुछ किया है मैंने सभी के लिए पर मेरी भावनाओं को तो कभी किसी ने नहीं समझा

अब मैं भी शायद जिंदगी का ये फलसफा सीख़ गया हूँ कि ज़िन्दगी हर पल हमें बहुत कुछ सिखाती है

पहले जिन बातों से मेरे होश उड़ जाते थे, आज मैं उन बातों पर बस मुस्कुरा कर ही काम चलाता हूँ

देखा है मैंने लोगों को बदलते हर पल, जो कभी अपने थे आज परायों जैसा बर्ताव करते हैं

बरसों से मेरा ये बेचैन दिल मुझसे कुछ फुर्सत के पल मांग रहा था

दिल मेरा मुझसे कहता है कि बहुत दर्द सह लिया है अब और नहीं

चलो ज़िन्दगी को खुल कर जियें अपने तरीके से और अपनी ही शर्तों पर

अब मैं पहले से ज्यादा खुश रहता हूँ और मुस्कुराता हूँ

दर्द भरे गीत छोड़ कर अब मैं गीत मिलान के गुनगुनाता हूँ

मेरे दिल में अब कोई गम नहीं, बस दिन रात अब तो मेरे सीने में एक मस्ती का दरिया बहता है

हर लम्हा जिंदगी का मुझसे कुछ कहता है, दिल मेरा अब सुकून की तलाश में रहता है

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