तेरी प्यारी सूरत देखे बिना चैन मुझे तो अब आता नहीं
दिल पर लिखा है मैंने नाम तेरा, तेरे सिवा कोई और मुझे भाता नहीं
ये कैसी चाहत है जो हर पल बस तेरा ही इंतज़ार करती है
मेरी हर एक साँस तेरी चाहत का ही इकरार करती है
मैंने तो दे दिया है अपना ये दिल तुमको देखते ही
मैं तुझे मिलने को जब चाहे बुला लूँ, इतना असर तो हो मेरी आहों में
अब ये फैसला तुमको करना है कि तुम कब आओगी मेरी बाँहों में
ज़िन्दगी का अब बस एक ही नज़र आ रहा है अंजाम
कि हर दिन गुजरे तेरी जुल्फों के साये में और तेरी आँखों में डूबे हर एक शाम
प्यार क्या है इसकी खबर मुझे आज से पहले इतनी नही थी
तेरी आंखें थी आज कुछ उदास, कहीं इनमे आंसुओं की नमी तो नहीं थी
अगर तुम मुझको मिल जाते इस बहार में, तो मैं अपने दिल को यूँ तड़पाता नहीं
तेरी प्यारी सूरत देखे बिना चैन मुझे तो अब आता नहीं

अपनी ज़िन्दगी की डोर तो मैं सौंप दी है अब तेरे हाथ
चाहे तो भुला दो मुझे या फिर वादा करो कि तुम दोगे मेरा जीवन भर का साथ
ये लाज शर्म का पर्दा ना जाने तुम कब गिराओगे
एक दिन ऐसा भी आएगा कि तुम तड़पकर मेरी इन बाँहों में आओगे
रूठी रहेगी आखिर कब तक मेरी तक़दीर मुझसे
तुम जलवा अपना दिखाकर मेरा बिगड़ा मुकद्दर आज संवार दो
अभी तक तो चल रही प्यासी मेरी ज़िन्दगी, तुम आकर इसको अपना प्यार दो
क्या फ़र्क रहेगी फिर आखिर अपनों और बेगानों में
अगर तुमने शामिल नही किया मेरा नाम अपने परवानों में
तुम मुझे कभी अपना बताती हो तो कभी बेगानों सा बर्ताव करती हो
बस एक बार तुम भी कह दो मुझको कि तुम भी मुझपर मरती हो
ये जानता हूँ मैं कि तुम पर भी नज़रें हैं इस ज़माने की
लोगों से नज़रे बचा कर ही तुम देती हो मुझको खबर अपने आने की
ये बहार का मौसम कहीं यूँ ही ना बीत जाये बस तेरे इंतज़ार में
आओ मिलकर दोनों कर ले प्यार, क्या रखा है तकरार में
अगर तुम मुझे ये पहले ही बता देती कि आज तुम मुझसे मिलने नहीं आओगी
तो फिर मैं ये गीत हमारे मिलान के यूँ ही गाता नहीं
तेरी प्यारी सूरत देखे बिना चैन मुझे तो अब आता नहीं

किसी से दिल लगाकर फिर उसको तन्हा छोड़ देना नहीं अच्छा
ये दिल की बातें अब तुम भी समझ जाया करो यही है मेरी एकमात्र इच्छा
मैं तो तुम्हे हर रोज़ अपने सपनों में देख लिया करता हूँ
जब भी तुम देखोगी दर्पण तो अक्स तुमको मेरा उसमे नज़र आएगा
मेरी मोहब्बत का असर तुम पर भी होगा, बस कुछ वक़्त ही और इसमें लग जायेगा
जब भी फूल खिलेंगे हमारी चाहत के इस गुलशन में
तो मैं बनकर एक प्रेमी भंवरा मंडराता रहूँगा इस उपवन में
सागर जैसी ये तेरी आँखें हर वक़्त जैसे लहराती रहती हैं
तेरे माथे की ये बिंदिया भी मुझसे ना जाने कितनी बातें करती है
तेरा और मेरा मिलना इस बरसात में कोई इत्तेफ़ाक़ तो नहीं हो सकता
आज पूरी कायनात जैसे एक हो गयी है हम दोनों को मिलाने में
इस मंज़र को मैं कैसे बयां करूँ, मेरे पास तो वो अल्फाज़ नहीं
मेरी मोहब्बत तो बेजुबान है, मेरे दिल की तो कोई आवाज़ नहीं
अगर तुम महसूस कर सको तो सुन लो मेरी इस प्यार भरी ख़ामोशी को
प्यार तो मैं तुमको बेहद करता हूँ पर शायद कभी तुझको जताता नहीं
तेरी प्यारी सूरत देखे बिना चैन मुझे तो अब आता नहीं
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