तुम्हारा ही रहूँगा मैं हमेशा, आज तुझे छूकर ये वादा कर रहा हूँ

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तुम्हारा ही रहूँगा मैं हमेशा, आज तुझे छूकर ये वादा कर रहा हूँ

अगर ये जाने वाला पल कुछ देर और ठहर जाए

तो शायद ये दिल मेरा तुमसे अपने दिल की बात कह पाए

जब भी देखता हूँ मैं तेरी आँखों में, मुझे इनमे अपना घर दिखाई देता है

इन आँखों में ही बसा लो मुझको, मेरे दिल पर तेरा असर दिखाई देता है

आओ मिलकर चलें हम मोहब्बत की इस डगर पर एक साथ

मुझे तुम संभाल लो, लेकर अपने हाथों में मेरा हाथ

किसी हसीना की तरफ मैंने तो कभी देखा नहीं, एक तूँ ही मेरी मंज़िल है

अगर मुझे तूँ ना मिली तो फिर मैं क्या करूँ उसका जो मुझको हांसिल है

तेरे वादे पे ऐतबार करके निकला हूँ मैं मेरी तलाश में

कहीं ये ज़िन्दगी यूँ ही ना बीत जाए तुझसे मिलने की आस में

कहीं तुम मेरी किसी बात का बुरा ना मान जाओ, बस यही सोच कर डर रहा हूँ मैं

तुम्हारा ही रहूँगा मैं हमेशा, आज तुझे छूकर ये वादा कर रहा हूँ

तेरे होंठ है या फिर गुलाब की पंखुड़ियां है ये, तुम कहो तो मैं छू लूँ इनको

तेरे हसीन चेहरे की रंगत बिखरी है चारों तरफ, तुम कहो तो आज अपने साथ ले चलूँ तुमको

एक बार मेरे घर पर आकर, ठहर जाओ रात भर के लिए

कभी तो मेरे साथ बैठ कर देखो इन चाँद और सितारों को

ये खामोश आसमान ना जाने कितने अरमान लिए बैठा है

सो गया है सारा जहान पर मेरी इन आखों में आज की रात नींद कहाँ

तुम ऐसे ना मुझे देखो प्यार से, कहीं मैं लिख ना दूँ मोहब्बत की एक नई दास्ताँ

जवानी के इस जोश में होश के लिए कुछ ख़ास जगह नहीं होती

तेरे इस सोने जैसे तन को सजाने के लिए, कम पड़ जाएँगे सारी दुनिया के हीरे-मोती

लोगों की बातों में मत आना, उनका क्या है वो कुछ तो कहेंगे

मेरी आँख के ये आँसू कब तक तेरे मिलने का इंतज़ार करते रहेंगे

अब तेरे साथ ही ये जीवन बिताना है, मैं आज ये इरादा कर रहा हूँ

तुम्हारा ही रहूँगा मैं हमेशा, आज तुझे छूकर ये वादा कर रहा हूँ

तेरी ये आँखें शायद कुछ कहना चाहती हैं मुझसे

तुम क्या जानों कि कितना प्यार करता हूँ मैं तुझसे

अगर मैं हूँ सागर तो मेरा किनारा तुम हो

मैं तो हूँ ग़म का मारा और मेरा एकमात्र सहारा तुम हो

ये जो रातें मैं काट रहा हूँ जागकर, इसके लिए तुम ही ज़िम्मेदार हो

ये माना कि बहुत तड़पाती हो तुम मुझे, पर फिर भी तुम ही मेरा करार हो

आज अगर इश्क़ की मैं नहीं जीत पाया तो क्या हुआ

कोशिश तो की मगर प्यार भरा गीत नहीं गा पाया तो क्या हुआ

तेरी उम्मीद और तेरा इंतज़ार मैं करता रहूँगा यूँ ही उम्र भर

तुम भी मुझे चाहोगी अगर सोचोगी मेरे बारे में कुछ देर ठहर कर

मुझे तेरी यादों से काम नहीं चलाना, मुझे अब बस तूँ ही चाहिए

अपने इस जीवन को प्यार से महकाने के लिए, तेरे बदन की खुशबू ही चाहिए

बिखरा-बिखरा सा था अब तक मैं, तुझसे मिलकर कुछ-कुछ संवर रहा हूँ

तुम्हारा ही रहूँगा मैं हमेशा, आज तुझे छूकर ये वादा कर रहा हूँ

किताबों की तरह से मैंने तेरे दिल को हर रोज़ पढ़ा है

तेरे रूप का जादू मेरे सर पर पूरी तरह से चढ़ा है

दिल की आवाज़ को मैं अपने इन लफ़्ज़ों से शायद बयां नहीं कर सकता

मेरे जज़्बात को मैंने खामोश रखा है अब तक, नहीं तो अगर मैं चाहूँ तो क्या नहीं कर सकता

मेरी ज़िन्दगी की यही हक़ीक़त है कि मैंने तुमसे बहुत प्यार किया है

तुम्हे देख रहा हूँ मैं अपने मन की आँखों से और ठंडी आहें भर रहा हूँ

तुम्हारा ही रहूँगा मैं हमेशा, आज तुझे छूकर ये वादा कर रहा हूँ

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