You are currently viewing रात सारी बेक़रारी में गुज़री अब सुबह का इंतज़ार है

रात सारी बेक़रारी में गुज़री अब सुबह का इंतज़ार है

रात सारी बेक़रारी में गुज़री अब सुबह का इंतज़ार है

कल का सूरज शायद उम्मीद की एक नयी किरण लाएगा

इस काली अँधियारी रात की सुबह कुछ तो हसीन होगी

जीवन में कभी कभी नाकामयाब भी होते हैं कई लोग

ऐसा भी लगता है कि मेरी जिंदगी बस एक अफसाना है

पर अगर तूने ठान लिया कि ये हालात बदलने है मुझको

तो तुझे देर से ही सही मंज़िल भी मिल ही जाएगी

भटकता रहा हूँ मैं आज तक कभी इस गली कभी उस गली

ना जाने मेरे दिल को क्या चाहिए बस चलता जा रहा हूँ

आज कुछ देर रुका हूँ तो मैंने ये महसूस किया है दिल से

सिर्फ ख्वाहिशो से नहीं गिरते फूल झोली में

जरा करम की शाख को भी हिलाना होगा

यूँ अंधेरो को कोसने से कुछ नहीं होगा मेरे दोस्त

अपने हिस्से का दीया तुझे ख़ुद ही जलाना होगा

रात सारी बेक़रारी में गुज़री अब सुबह का इंतज़ार है