ग़म के साये से निकल कर तू अब जीना सीख ले
और भी बहुत ग़म हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा
माना कि ज़िन्दगी तेरी मुश्किलों से भरी है
आँखों में तेरी आँसू है और दिल भी बेकरार है
पर रुकना नहीं है तुझे जब तक मंज़िल ना मिले

लोगों की मत सोचो कि वो क्या कहेंगे
लोग तो बस तेरी राहों में काँटे ही बिछा सकते हैं
ऐसा कोई नहीं मिलेगा जो तेरा साथ देगा मुश्किल में
उम्मीद ना कर किसी से कोई तू अकेला ही काफी है
ख़ुदा तेरे साथ है तू क़ोशिश तो कर के देख
कहते हैं कि आसमान में भी छेद हो सकता है अगर तू चाहे

एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों
रास्ता बना देगा समंदर भी तेरे लिए
तू एक बार लहरों पर सवार होकर तो देख
अपने जख्म सिल ले और अश्कों को अब तू पीना सीख़ ले
ग़म के साये से निकल कर तू अब जीना सीख ले
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