रुकावटें ज़िन्दगी की रोक नहीं सकती मुझको अब आगे बढ़ने से
नही ये हो नही सकता कि मैं हार जाऊँ और अपना सर झुका दूँ हालात के सामने
मैं हमेशा याद रखता हूँ वो सपना जो मेरी इन आँखों ने देखा था कभी
ज़िन्दगी को तो कोई भी जी लेता है पर इसका मज़ा नहीं ले सकते सभी

आज ये दिल मेरा इस बात से बेचैन है कि मंज़िल अब तक मुझको मिली नही
कुछ कलियाँ जो फूल बन सकती थी, आज वो लगती हैं कुछ मुरझाई सी
वक़्त के किये हर जुल्म और सितम को मैंने हंस कर सहा है
चाहे लाख तूफ़ान आये हो जीवन में, पर मैंने किसी से कभी भी कुछ ना कहा है
रुक जाना मेरी मंज़िल नहीं, चलते जाना मेरी फितरत है

मुश्किलें तो आनी हैं आकर चली जाएँगी पर ये वक़्त फिर लौट कर नहीं आएगा
खुद को संभाल कर अपने सफर पर वापिस लौट रहा हूँ मैं
किसी के साथ का इंतज़ार करना शायद बेमानी होगा
इसलिए मैंने अपने किरदार को खुद ही लिखा है अकेलेपन से
ये भी सच है कि कामयाबी के लिए ज़िद्दी होना बहुत ज़रूरी है

इसीलिए मुश्किलों को अपने घर का पता खुद ही दिया है मैंने
जिस दिन मैं गिर कर उठता नहीं, वो दिन मेरे लिए किसी काम का नहीं
माना कि ऊंचाई के साथ कांटे और भी बढ़ेंगे राहों में
फिर भी मैं रुक नहीं सकता ऊपर चढ़ने से
रुकावटें ज़िन्दगी की रोक नहीं सकती मुझको अब आगे बढ़ने से

जब भी कभी ऐसा लगेगा कि अब मैं और नहीं चल पाउँगा
उस वक़्त मैं एक और कदम आगे बढ़ा दूंगा अपनी मंज़िल की तरफ
हौसला रखूँगा अपने दिल में चाहे कितनी भी अँधेरी हो जाये रात
उम्मीद की रौशनी को मैं हमेशा रोशन रखूँगा चाहे जैसे भी हो हालात
अगर पैर मेरे थक भी गए तो भी क्या, रुकूंगा नहीं मैं बीच रास्ते में

इस सफर को मैं हमेशा अपने दिल के करीब रखूँगा भले ही ये मुश्किलों से भरा है
चैन और सुकून की दरकार अब मुझे नहीं, ना ही किसी से मुझे डर लग रहा है
कुछ भी कहने और सुनने की ज़रूरत अब नहीं रही, चाहे जो भी हो अंजाम
ख़ाली बैठ कर मैं वक़्त अपना क्यों बर्बाद करूँ, अभी तो मुझे करने है बहुत से काम
किनारे बैठ कर नौका को देखते रहने में क्या मज़ा है

मैं तो उफनती हुई लहरों की सवारी करने को बेताब हूँ
ज़िन्दगी की किताब का फलसफ़ा है बहुत मुश्किल, पर मुझको गुरेज़ नहीं इसको पढ़ने से
रुकावटें ज़िन्दगी की रोक नहीं सकती मुझको अब आगे बढ़ने से
इम्तिहान ले रही है हर घड़ी ये ज़िन्दगी पर हम भी बड़े दिलवाले हैं
सीने में हमने खुशियां ही नहीं, बहुत से गम भी संभाले हैं

आँखों पर हमने चाहत का चश्मा लगा रखा है और देखता हूँ सबको प्यार भरी नज़र से
जो भी गुज़र रहे हैं इन संघर्ष भरी राहों से उन सबको मेरा सलाम
जब भी सामना होता है नाकामयाबियों से तो मैं अंदर से और मज़बूत हो जाता हूँ
डर की चारदीवारी से बाहर निकल कर मैं हर हाल में गीत ख़ुशी के गाता हूँ

लोग पूछते हैं मुझसे राज़ खुश रहने का और मैं बस मुस्कुरा देता हूँ
मंज़िल पर नज़र रखता हूँ मैं हर वक़्त, चलता हूँ अनजान राहों पर और डरता नहीं भटकने से
रुकावटें ज़िन्दगी की रोक नहीं सकती मुझको अब आगे बढ़ने से

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