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क्या लिखूँ आज मैं कुछ ख़ास, मुझे तो कुछ समझ नहीं आता

क्या लिखूँ आज मैं कुछ ख़ास, मुझे तो कुछ समझ नहीं आता

ऐसा भी हो जाता है इस जीवन में कभी-कभी

कि दिल जज्बातों से भरा होता है पर शब्द मिलते नहीं

लोग कहते हैं कि आज खुल के बोल दो अपने दिल की बात

पर क्या करूँ मैं कि विचार हमारे हर किसी से मिलते नहीं

हर किसी को दोस्त कह देना बहुत आसान होता है

पर दोस्ती को निभाता है कोई-कोई

साथ रहने की कसमें तो खाते हैं सभी

पर असली में साथ निभाता है कोई-कोई

इस ज़माने की भीड़ में यूँ तो लाखों लोग बस्ते हैं

पर मेरे इस दिल में समाता है कोई-कोई

क्या करूँ मैं कि हर कोई मेरे दिल को नहीं भाता

क्या लिखूँ आज मैं कुछ ख़ास, मुझे तो कुछ समझ नहीं आता

कुछ प्यार भरी बातें करके लोग अक्सर लूट लेते हैं आपको

क्या मिला है मुझको वफ़ा का टोकरा अपने सिर पर उठा कर

जिसका भी मतलब निकला, उसने छोड़ दिया मुझको अपना बना कर

ये ज़िन्दगी के रंग भी कितने अजीब हैं

जिसको हम चाहते हैं वो हमें कभी मिलता ही नहीं

और जो हमें चाहते हैं उनको हम मिलना नहीं चाहते

खैर किसी को चाहना या ना चाहना किसी के बस की बात नहीं

चाहत के फूल कभी किसी से पूछकर तो खिलते नहीं

आज फिर हम तुमको अपना बनाने की कसम खा बैठे हैं

क्या तुमको भी खुद पर इतना ही यकीन है

वफ़ा की राह पर दिल कई बार घायल होता है

कैसे सम्भालूं मैं दिल मेरा, ये मुझको कोई नहीं समझाता

क्या लिखूँ आज मैं कुछ ख़ास, मुझे तो कुछ समझ नहीं आता

चलना और फिर अचानक से रुक जाना जीवन के सफर में

ऐसा भी अक्सर होता ही रहता है हर किसी के साथ

जब भी मैं सीधा-सीधा चल रहा होता हूँ

तो अचानक से ज़िन्दगी मेरे रास्ते में कई मोड़ ले आती है

ना जाने कितने चौराहों पर आकर खड़ा हो जाता हूँ मैं

अब किस रास्ते पर आगे बढ़ना है मुझको ये कौन बतलाएगा

जब भी कभी मायूस मैं हो जाऊंगा तो कौन मेरा हौंसला बढ़ाएगा

चाँद की चांदनी भी आज कुछ मद्धम है

रात हो गयी है घनी और अँधेरी

दीपक में आज देखा तो तेल भी काफी कम है

ये आज की रात ना जाने कैसे कटेगी ये सोचता हूँ मैं

किसकी महफ़िल में जाऊँ और किसकी महफ़िल को मैं छोड़ दूँ

यूँ ही बेवजह आखिर कैसे मैं किसी का दिल तोड़ दूँ

ज़िन्दगी ना जाने कैसे बस गुज़र ही रही है

इसमें चार-चाँद लगाने वाले का ना जाने कब से इंतज़ार है

कोई पास आकर मुझे कहदे कि हमको बस तुम से ही प्यार है

साथ रहने का वादा करके नज़रों से दूर हो जाना

अपने चाहने वाले को तो ऐसे कोई नहीं सताता

क्या लिखूँ आज मैं कुछ ख़ास, मुझे तो कुछ समझ नहीं आता

मेरी चाहत के किस्से अब चारों तरफ हो रहे हैं मशहूर

आखिर हुस्न के नशे में तुम कब तक रहोगे मगरूर

एक दिन आएगा कि दीवानगी मेरी भी रंग लाएगी

मेरी प्यार भरी बातें तुझको रात भर जगाएंगी

अगर ऐसा हुआ तो तुम खुद को मत रोकना

डाल देने अपनी बाँहों का हार मेरे गले में और झूमना

ये सब खूबसूरत ख्याल बस तेरे लिए ही हैं

बरसो से संभाल के रखा है मैंने अपने अरमानों को

अगर मेरी किस्मत में तुझसे मिलना लिखा होगा

तो फिर चाहे तूँ लाख मना करले हम मिलकर रहेंगे

तक़दीर में जो लिखा है उसको फिर कोई नहीं मिटाता

क्या लिखूँ आज मैं कुछ ख़ास, मुझे तो कुछ समझ नहीं आता

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