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मैंने जो भी चाहा वो मुझे ना मिला, अब मेरी तो कोई चाहत नहीं

मैंने जो भी चाहा वो मुझे ना मिला, अब मेरी तो कोई चाहत नहीं

सच कहा है किसी ने कि ज़िन्दगी है एक पहेली

कुछ नहीं पता कि कौन है सौतन और कौन सहेली

प्यार भरी मुलाकाते ना जाने कब कह दें अलविदा

जिसे तुम चाहो वो हो जाये तुमसे एक दिन जुदा

जब भी मैंने कोशिश की कुछ शोहरत पाने की

मुझको लग गयी नज़र इस बेदर्द ज़माने की

हो सकता है कि कल मेरी इस कहानी पर कोई यकीन ना करे

लोगों को शायद आदत नहीं है मेरे करीब आने की

गुमनामी के साये में गुज़र रही है मेरी ये ज़िन्दगी

सब कुछ कर के देख लिया पर हांसिल कुछ भी नहीं

कुछ समझ नहीं आता कि क्या है गलत और क्या है सही

हर तरफ हैं आंसुओं के डेरे, मुझे तो मिलती कहीं राहत नहीं

मैंने जो भी चाहा वो मुझे ना मिला, अब मेरी तो कोई चाहत नहीं

कई बार सोचता हूँ कि दूर कहीं पर बसा लूँ एक नयी दुनियाँ

क्या कहें यहाँ तो हमारा कोई कद्रदान नहीं

बेरुखी इस कदर हुई है कि बर्दाश्त करना मुश्किल है

फुर्सत के कुछ पलों को ढूंढ़ता आजकल मेरा ये दिल है

तेरी आने की उम्मीद में मैंने चरागों को आज भी रोशन रखा है

सोचा था कि प्यार मिलेगा पर हमेशा नफरत का ही स्वाद चखा है

सच पूछो तो अब प्यार से कोई देखता है तो यक़ीन नहीं होता

कुछ ऐसा लगता है कि जैसे दूर तक फैली ख़ामोशी है

मेरे नक़्शे-कदम पर कोई भला क्या चलेगा

किसी के आने की अब होती कोई आहट नहीं

मैंने जो भी चाहा वो मुझे ना मिला, अब मेरी तो कोई चाहत नहीं

सोचा था कि कभी मेरा भी होगा एक छोटा सा ठिकाना

खुलकर करूँगा में दिल की बातें अपनों से

पर मैं भूल गया था कि दुनियाँ अब बदल चुकी है

अपने और परायों में अब लगता कोई भेद नहीं

जिसको भी देखो वो मसरूफ है मिलने का किसी को वक़्त नहीं

चलते-चलते इस डगर पर मज़िल का कोई नामोनिशान नज़र नहीं आता

घर कैसा होता है ये तो मैंने लोगों से ही सुना है अब तक

मैं तो मुसाफिर हूँ यारों, मेरा तो अब तक कोई एक ठिकाना नहीं

बस एक तुझको पाने की ज़िद की थी मैंने

पर शायद मैं गलत था और अब बस तन्हाई का साथ है

दिल टूट गया मेरा जब मैंने देखा ये नज़ारा

कि किसी और के हाथों में तेरा ये हाथ है

बेचैनी कुछ ऐसी महसूस होती है कि नींद अब आती नहीं

तेरी याद जब एक बार आती है तो फिर जाती नहीं

रात भर करवटें बदलना हो गया है अब मेरी मजबूरी

दिल मेरा कहता है कि अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होती ये दूरी

तुम अगर एक मौका दें दो मुझको तो मैं तुमसे यही कहूंगा

कि तुम्हारी एक ख़ुशी के खातिर मैं दर्द हज़ारों ख़ुशी से सहूंगा

अगर तुम मुझको कर लो क़बूल तो तेरा एहसान होगा मुझपर

बरसों से मैंने कोई ख़ुशी का मौका नहीं देखा

इस मुरझाये हुए जीवन को तुम अपनी खुशबू से महका दो

डाल कर अपनी तिरछी नज़र, मेरे दिल को तुम आज बहका दो

चाहे लाख कोशिश की सबने पर अभी तक हुआ मैं हताहत नहीं

मैंने जो भी चाहा वो मुझे ना मिला, अब मेरी तो कोई चाहत नहीं

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