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तुम से जुदा होकर जाना है कि इश्क़ क्या होता है

तुम से जुदा होकर जाना है कि इश्क़ क्या होता है

क्यों बन जाता है कोई आशिक़ और रात दिन रोता है

कहतें हैं कि इश्क़ और मुश्क को छुपाना बड़ा मुश्क़िल है

पर जुल्म ये है कि मेरा ही महबूब मेरा क़ातिल बना है

तो आप ही बताओ कि किससे छुपाएँ और कहें किससे

चाँद से इश्क़ कि सजा चकोर को मिलती है

बेचारा ना तो कुछ कह सकता है बस चुपचाप देखता है

चाँदनी रात भी जब हमें बेचैन कर देती है

याद आपकी आकर हमें रात भर जगाती है

कोई कहता है कि इश्क़ का रंग है धीरे धीरे चढ़ता है

पर मैं तो हर साँस के साथ ही नाम तेरा लेता हूँ

चलते चलते अपने पैरों के छालों को अश्कों से धोता हूँ

जब तूँ नहीं तो तेरी याद ही सही इसी धुन में रहता हूँ

यूँ तो जमानें में हसीनों की कोई कमी तो नहीं है

पर जो बात तुझमें है वो तो किसी में भी नहीं

चलो आज तुमको एक ग़ुलाब दे ही देता हूँ

पर सोचता हूँ कि तुम क़बूल करोगी कि नहीं

कहीं वो ग़ुलाब भी मेरी तरह से मुरझा ना जाए

कोई और ही कहीं तेरे दिल को चुरा ना ले जाये

वास्ता है तुम्हे हमारी हसीन मुलाकातों का फिर से

आ जाओ वापिस मेरी ज़िन्दगी में बहार बनकर

कहीं ये ज़िन्दगी यूँ ही ख्यालों में में ना गुज़र जाये

बहुत ठोकरें खा चूका हूँ मैं अब तक तेरी राहों में

अब और मैं बर्दाश्त नहीं कर पाउँगा

अगर तुम मुझे अब भी ना मिली तो मैं मर जाऊँगा

याद करो वो कसमें जो हमने साथ मिलकर खाई थी

चाहे लाख तूफ़ान आये हम ना बिछड़ेंगे तुमने कहा था

और मैं भी पागल मुझे खुद से ज्यादा तुम पर यकीन था

शायद मैं भूल गया था इन हसीनों कि अदाएं

जो यार को बर्बाद करके अपना घर आबाद करती हैं

आज शहनाई तो बज रही है पर तुम्हारा साजन कोई और है

क्या यही था तुम्हार प्यार कस्मे वादें और इश्क़

ख़ैर छोड़ो यारों प्यार इश्क़ और मोहब्बत तो सब बस नाम के है

आज के इस ज़माने में भला ये किसके काम के हैं

दग़ा दिया उन्ही दोस्तों ने जिनको मैंने अपना हाल ए दिल सुनाया

हँसती है दुनिया अब मुझ पर और मैं आज तन्हा हूँ

तेरी तस्वीर को भी आज हटा देना चाहता हूँ

पर शायद मेरे हाथ ये काम ना कर पाएंगे

दिल के किसी कोने में आज भी तेरा इंतज़ार है

यहीं इंतज़ार अब मेरे जीने कि वज़ह बन गया है

इतना इश्क़ अगर रब से किया होता

तो वो भी मेरा बन जाता सदा के लिए

पर अब ये बातें बहुत हो गयी अब देर हो चुकी है

शायद मेरे आगे बढे कदम अब पीछे ना लौट पाएं

तड़पता रहता हूँ मैं हर वक़्त तेरी याद में और दिल ये मेरा मुझसे कहता है

तुम से जुदा होकर जाना है कि इश्क़ क्या होता है