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अपने भीतर उतर कर जो आज मैंने देखा है

अपने भीतर उतर कर जो आज मैंने देखा है
तो ना जाने क्यों कोई भी अपना सा नहीं मिला
तुमने तो कहा था कि तुम्हारा प्यार मेरे दिल में मिलेगा
पर ऐसा तो कुछ भी ना था मेरे भीतर
इतना आसान भी नहीं है अपने भीतर उतर पाना
डर लगता है कि कहीं हम खो ना जाएं कहीं
चलते-चलते आज फिर मन कुछ बोझिल सा लग रहा है
तेरी अदा भी मुझे अब कुछ फीकी सी लगने लगी है
क्या फायदा अगर इस ज़माने की सारी दौलत हमको मिल भी जाये
कहाँ रखूँगा मैं इसको मेरे पास तो कोई तिजोरी भी नहीं
मत आना कोई भी मेरे पास, अब मैं भीतर से ख़ाली हो रहा हूँ
हर रिश्ते और नाते से मैं अब बहुत दूर निकल चूका हूँ
ना तो कोई किसी के साथ जीता है और ना ही कोई मरता है
सब झूठी बातें हैं इस दुनिया में सच कुछ भी नहीं
तेरी उम्मीद तो हमने कभी की ही नहीं
तो फिर तुमको अब किस बात का गुमान है
अच्छा तो अब मैं चलता हूँ, मेरे पीछे मत आना
तुम मेरे हो, मेरी नज़रों का एक धोखा है
अपने भीतर उतर कर जो आज मैंने देखा है

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