
गम के इन अंधेरों में बस एक रौशनी की किरण ढूंढ़ता हूँ मैं
तुम्हे क्या बताऊँ कि अंदर से कितना टूट चूका हूँ मैं
फिर भी तेरे घर का पता लोगों से पूछता हूँ मैं
इस दिल की बेकरारी का सबब पूछो ना सब के सामने
नाम आ जायेगा तुम्हारा और लोग मुश्किल कर देंगे तेरा जीना
आइनों के इस शहर में अपना अक्स ढूंढ़ता हूँ मैं
जिस शख्श को खो चूका था बरसों पहले मैं
आज फिर से इस तन्हाई में उसको ढूंढ़ता हूँ मैं
सोचा था कि तेरी गलियों में ना रखेंगे कदम आज के बाद
पर क्या करें तुम्हे देखने की आदत मुझे तुम्हारे पास खींच लाती है
प्यार की बस एक खुराक के लिए कई दिनों से भूखा हूँ मैं
तुझे पाने की प्यास अब मेरी हर ख्वाहिश पर भारी है
जो भी बातें छिपी थी इस दिल में आज वो सब लिख डाली है
अब ये तुम्हारी मर्ज़ी है कि तुम मुझे करो या ना करो कबूल
मैं तो बस इन आँखों को मींच कर तुम्हारे पीछे आ गया हूँ
मुझे यक़ीन नहीं होता जब मैं तुम्हारी बेवफाई के किस्से लोगों से ढूढ़ता हूँ
गम के इन अंधेरों में बस एक रौशनी की किरण ढूंढ़ता हूँ मैं
We offer poem and lyrics writing services for all your needs: personal or professional in English and Hindi. To avail the service, please contact by email: rajeevkharb_2007@rediffmail.com




