प्यार की गलियां और बागों की कलियाँ पूछ रही हैं कि कब आओगे तुम

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प्यार की गलियां और बागों की कलियाँ पूछ रही हैं कि कब आओगे तुम
जल्दी से चले आओ मेरे मेहबूब कि दिल ये मेरा बेकरार सा है
दिल के पास आओ तो कुछ राहत मिले, दूर से मिल के मुझे चैन ना आए
तेरी आँखें जब से मिली हैं मेरी इन आँखों से तब से बेकरार बैठा हूँ
वो गुजरे हुए लम्हे फिर से एक बार तुम्हे बुलाते हैं
जो भी ख्वाब देखे थे हमने मिलकर वो फिर से तेरी याद दिलाते हैं
मोहब्बत है क्या चीज़ ये अब समझ में आ रहा है हमको
दिल का ये रोग भी अजीब है जो लग जाए तो फिर कोई कहीं का नहीं रहता
क्या करें हम अब तो हर वक़्त तुझे मिलने की है लगी लगन
तेरे सुर्ख होंठ और गालों की लाली मुझसे बहुत कुछ कहती है
चलो अब गिरा दो अपनी शर्म का पर्दा और करीब आ जाओ
इस सुहाने मौसम का मज़ा लेने दो और सीने से मेरे लग जाओ
तुझे प्यार करते-करते मैं कहीं खुद को ना भुला दूँ
कबूल कर लो मेरे इश्क़ को मेरी जान क्यूंकि
एक बार जो चला गया मैं तो बहुत पछताओगे तुम
प्यार की गलियां और बागों की कलियाँ पूछ रही हैं कि कब आओगे तुम