
तुम्हारी ज़िन्दगी का मक़सद क्या है? ये कब जानोगे तुम?
ये सांसें चल रही है आज तेरी बस यही ज़िन्दगी नहीं होती
जब से पैदा हुए हो बस दुनिया की बातों को सच मान बैठे हो
जिसने भी जो बताया और सिखाया वो मान लिया तूने
पर तुम्हारे मानने से आगे जहाँ और भी है क्या ये जानते हो तुम
बस वही सच नहीं है इस दुनिया में जो मानते हो तुम
ना तो तुम्हारे हाथ में है कि कहाँ तुम पैदा हुए
और ना ही तुम्हारे हाथ में है कि कब तुम मरोगे
जब ये दोनों ही चीज़ें तुम्हारे हाथ में नहीं हैं
तो फिर तुम्हारे हाथ में आखिर है क्या, क्या ये सोचा है तुमने
बस जिए जा रहे एक ऐसे खिलोने की तरह जिसमे बस चाबी भरी हुई है
मेरा घर, मेरे बच्चे, मेरी नौकरी ये सब बस एक छलावा ही है
ना तो तुम कुछ लेकर आए थे और ना ही तुम कुछ लेकर जाओगे
ख़ाली हाथ आये थे इस दुनिया में और ख़ाली हाथ ही जाओगे
अब साथ तुम्हारे क्या जाएगा ये भी सुन लो तुम
तुम्हारे साथ जाएंगी लोगों की दुआएं बस ये जान लो तुम
अपने जीवन को तुम महकता हुआ गुलाब बना सकते हो
अगर तुम अपने जीवन का मकसद बना लो लोगों की ख़ुशी
क्यूंकि किसी ने ये भी क्या खूब कहा है कि अपने लिए जिए तो क्या जिए
इस बात को आखिर कब मानोगे तुम
तुम्हारी ज़िन्दगी का मक़सद क्या है? ये कब जानोगे तुम?




